आडवाणी लोकसभा में विपक्ष के नेता

भारतीय जनता पार्टी की संसदीय दल की बैठक में लालकृष्ण आडवाणी को लोकसभा में पार्टी का नेता चुना गया है. आडवाणी पिछली लोकसभा में भी विपक्ष के नेता रहे थे. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि आडवाणी अगले पांच साल इस पद पर रहेंगे या नहीं.
आडवाणी ने इस अवसर पर पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस यह समझने की ग़लती न करे कि यह जनादेश यूपीए सरकार के पिछले पांच साल के प्रदर्शन के लिए मिला है. विपक्ष के नेता का कहना था कि जनता ने ''स्थायित्व और द्विध्रुवीय राजनीति'' की चाहत में ऐसा वोट दिया है और बीजेपी भारत की राजनीति का दूसरा ध्रुव है.
उनका कहना था कि यह जनादेश तीसरे मोर्चे के ख़िलाफ है जिसका फ़ायदा कांग्रेस को हुआ है. आडवाणी ने उम्मीद जताई कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन ''ज़िम्मेदार सरकार'' की भूमिका निभाएगी और लोगों की उम्मीदों पर ख़री उतरेगी. उनका कहना था कि बीजेपी ''सकारात्मक विपक्ष'' की भूमिका निभाएगा.
इसके बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता आडवाणी आने वाले दिनों में राज्य सभा में पार्टी के नेता और दोनों सदनों में पार्टी के उपनेता का चयन करेंगे. इतना ही नहीं संसदीय कार्यकारी समिति बनाने का अधिकार भी विपक्ष के नेता आडवाणी को सौंपा गया है.
आडवाणी को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाने का प्रस्ताव जसवंत सिंह ने रखा जिसका मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज ने समर्थन किया. हालांकि आडवाणी ने पहले ये ज़िम्मेदारी लेने से इंकार किया था लेकिन बाद में राजनाथ सिंह ने उन्हें यह ज़िम्मेदारी लेने के लिए मनाया है. शायद यही कारण है कि अभी इस बारे में स्पष्ट रुप से कोई कुछ नहीं कह रहा है कि आडवाणी अगले पांच साल इस पद पर रहेंगें या नहीं.


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