भरतनाट्यम और कन्नड़ गीतों के सहारे जापानियों ने लोगों का मन मोहा
इसी तरह जब टोयोटा किर्लोस्कर मोटर प्राइवेट लिमिटेड की इंजीनियर जापानी हिरोशी चिबा ने लोकप्रिय कन्नड़ फिल्मी गीत 'सांतोशेक्क' (खुशी के लिए) गाया तो श्रोता मुग्ध हो उठे।
यह अवसर था जापान हब्बा (जापान महोत्सव) 2009 का। भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान का यह कार्यक्रम देश के विभिन्न स्थानों पर रहने वाले जापानियों के लिए किया जाता है। इस अवसर पर देश भर से करीब 1,000 जापानी एकत्रित हुए।
इस कार्यक्रम का आयोजन पहली बार सन 2005 में बेंगलुरू स्थित जापान के वाणिज्यिक दूतावास, जापान फाउंडेशन नई दिल्ली, बेंगलुरू विश्वविद्यालय तथा निहोंगो क्यूशी-काई, कोयो समूह, जापानीज एसोसिएशन ऑफ बेंगलुरू और इंडो-जापानीज चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (कर्नाटक) आदि जापानी संगठनों ने मिलकर किया था।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए बेंगलुरू स्थित वाणिज्य दूतावास के प्रमुख मसायुकी त्सुचिकावा ने कहा, "हम पहली बार जापान हब्बा से जुड़कर प्रसन्न महसूस कर रहे हैं। यह भारत और जापान के लोगों के बीच संवाद का बहुत अच्छा जरिया है।"
उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति ही वह माध्यम है जो दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों में सेतु का काम कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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