रुड का हमलावरों को दंडित करने का आश्वासन, 18 छात्र रिहा (लीड-1)

रुड ने केनबरा में संसद में कहा कि गत सप्ताहांत उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से फोन पर बातचीत में कहा था कि आस्ट्रेलियावासी देश में पढ़ने वाले छात्रों पर इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा और भर्त्सना करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।

इधर भारत में इस मसले को लेकर काफी आक्रोश है। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने उम्मीद व्यक्त की है कि भारतीय छात्रों की समस्याओं का हल निकल आएगा।

मेलबर्न और सिडनी में भारतीय छात्रों पर हमले की हाल ही में चार घटनाएं हुई हैं। पहला हमला नौ मई को और ताजा हमला सप्ताह भर पहले हुआ।

भारतीय छात्रों पर हमले की तीन घटनाएं मेलबर्न में हुईं। श्रवण कुमार पर पेचकस से हमला किया गया, बलजिंदर के साथ लूटपाट की गई और उसे धारदार हथियार से घायल कर दिया गया। सौरभ शर्मा को पीट-पीटकर उसके गाल की हड्डी और एक दांत तोड़ दिया गया।

सिडनी में राजेश कुमार पर पेट्रोल बम फेंककर उसे घायल कर दिया।

केविन रुड ने कहा, "मैंने मनमोहन सिंह से कहा कि 90,000 से ज्यादा भारतीय छात्र आस्ट्रेलिया में हैं और वे हमारे सम्मानित अतिथि हैं।..इसके अलावा 200,000 से ज्यादा भारतीय मूल के आस्ट्रेलियाई यहां रहते हैं और आस्ट्रेलियाई समाज में उनका स्वागत है।"

आस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय छात्रों की संख्या 18 प्रतिशत है।

रुड ने कहा कि आस्ट्रेलिया अनेकता और सहनशीलता वाला देश है। इसलिए हमले की हाल की घटनाएं और भी ज्यादा निंदनीय हैं।

इससे पहले रविवार को भारतीय समुदाय के 1,000 से ज्यादा सदस्यों ने इन हमलों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए मेलबर्न में जुलूस निकाला था।

प्रदर्शनकारियों ने इन हमलों को नफरत की वजह से किया गया अपराध करार दिया है। इस बीच पुलिस ने हिरासत में लिए गए 18 प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा कर दिया है।

विपक्षी लिबरल पार्टी के नेता मेल्कम टर्नबुल ने भी मारपीट की इन घटनाओं की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये छात्र हमारे देश के मेहमान हैं और इस व्यवहार से आस्ट्रेलिया की छवि को नुकसान पहुंचा है।

इस बीच विदेश मंत्री कृष्णा ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रुड ने आपस में बातचीत की है और उन्होंने भी आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री स्टीफन स्मिथ से फोन पर बातचीत की है।

कृष्णा ने यहां संवाददाताओं को बताया, "हमारा उच्चायोग भारतीय छात्रों और आस्ट्रेलिया सरकार के साथ संपर्क बनाए हुए है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि यह मसला सुलझ जाएगा।"

उधर आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले की लगातार वारदातों के बाद गठित समिति ने कहा है कि यहां भारतीय छात्रों का अपना एक अधिकारी होना चाहिए जिसके पास वे संकट के समय मदद के लिए जा सकें। समिति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को पहले छह महीने तक भारतीय छात्रों के हर तरह की सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।

समिति के समन्वयक यदु सिंह ने कहा, "अधिकांश हमले मौका देखकर किए गए और कई कारणों से हमारे छात्र उनके लिए आसान शिकार रहे हैं।"

उन्होंने भारतीय छात्रों के स्वास्थ्य और आपातकालीन बीमा कराने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे को पहली प्राथमिकता नहीं दी गई तो आस्ट्रेलिया का 15 अरब डॉलर का कारोबार खतरे में पड़ जाएगा।

इस बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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