पाकिस्तानी विस्थापितों को आटे की जगह दिया जा रहा गेहूं
खबर है कि विस्थापितों के बीच आटे की जगह गेंहू का वितरण किया जा रहा है। इस वजह से लोग मिलों में गेहूं को बेहद कम दामों पर बेचते हैं और फिर बढ़ी हुई कीमतों में आटा खरीदते हैं।
स्थानीय समाचार पत्र 'द न्यूज' ने अपने संपादकीय में कहा है, "हम सभी जानते हैं गेंहू को पीसने के बाद ही आटा बनता है और तभी उससे रोटी बनाई जा सकती है। परंतु यहां लोगों को बिना चक्की के गेंहू दिए जा रहे हैं। यह ठीक उसी तरह है जैसे गर्मी के दिनों में उन्हें चॉकलेट की साइकिल देना।"
अखबार का कहना है कि स्वात, बुनेर और निचले दीर इलाके में लड़ाई की वजह से लगभग 30 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और अभी इन लोगों की मुसीबत का कोई छोर नहीं दिखता है।
गौरतलब है कि इस्लामाबाद स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कहा है कि विस्थापितों की मदद और पुनर्वास के लिए 54.3 करोड़ डॉलर की आवश्यकता पड़ेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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