मिंगोरा शहर को नुकसान, मानवीय संकट

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास ने स्वात में मानवीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है.
स्वात पहुंचे बीबीसी उर्दू के संवादाता का कहना है कि मिंगोरा शहर में युद्ध के कारण ज़बर्दस्त क्षति हुई है और शहर की लगभग सभी इमारतें टूट फूट गई हैं.
उर्दू संवाददाता रिफतुल्ला ओराकज़ई के अनुसार शहर के मुख्य चौराहे की सभी दुकानें और घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं.
शहर में कर्फ्यू हटाए जाने के बाद स्थानीय लोग राशन पानी लेने शहर के चौराहे पर रहे हैं और सेना के अनुसार शहर में ज़रुरत की सेवाएं बहाल की जा रही हैं.
स्वात की जनता को तत्काल मानवीय सहायता, सुरक्षा और राहत की आवश्यकता है अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास समिति
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रेड क्रास का कहना है कि शहर में न तो बिजली और न ही पानी उपलब्ध है. इतना ही नहीं जेनरेटरों के लिए तेल और मेडिकल सेवाएं न के बराबर हैं और खाना मिलना भी मुश्किल हो रहा है.
कुछ इलाक़ों में अभी चरमपंथी छिपे हुए हैं
पाकिस्तान पहुंचे रेड क्रास के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख पास्कल कट्ट का कहना था, '' स्वात की जनता को तत्काल मानवीय सहायता, सुरक्षा और राहत की आवश्यकता है.''
मानवीय मामलों के समन्वय के संयुक्त राष्ट्र अधिकारी फवाद हुसैन का कहना था, '' बिजली नहीं होने के कारण कुंओं से पानी निकालना संभव नहीं है. लोगों को पानी के दूसरे स्त्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है जिससे बीमारियां फैल रही हैं. मेडिकल सुविधाएं बिल्कुल ठप हैं. ''
स्वात में क़रीब महीने भर पहले सैन्य अभियान शुरु हुआ था जिसमें क़रीब 25 लाख लोग अपने घर छोड़कर चले गए थे.
शनिवार को पाकिस्तानी सेना ने मिंगोरा शहर को पूरी तरह तालिबान की गिरफ़्त से मुक्त कर लिया था.
रक्षा सचिव सैयद अतहर अली ने उम्मीद जताई है कि अगले दो-तीन दिनों में सेना स्वात घाटी और आस-पास इलाक़ों से तालेबान को पूरी तरह ख़त्म कर देगी.
उन्होंने रविवार को सिंगापुर में एशियाई देशों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब सिर्फ़ पाँच से दस फ़ीसदी काम बाक़ी है और सेना तालेबान नेताओं को निशाना बना रही है.
उनका बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी सेना ने स्वात घाटी के मुख्य शहर मिंगोरा को चरमपंथियों से खाली करा लेने का दावा किया है.
हालाँकि पाकिस्तान स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सेना अपने अभियान में सतर्कता बरत रही है और उसे तालेबान का प्रतिरोध ख़त्म करने में कुछ हफ़्ते और लग सकते हैं.
इस बीच अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ान सीमा के पास सेना पर तालेबान लड़ाकों ने हमला कर दिया जिसमें चालीस चरमपंथियों के मारे गए हैं.
लगभग आठ घंटे तक चली लड़ाई में चार जवान भी मारे गए.


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