भारतीय छात्रों का मेलबर्न में शांति मार्च

इस रैली का आयोजन फेडरेशन ऑफ़ इंडियन स्टूड़ेंट्स इन ऑस्ट्रेलिया और नेशनल यूनियन ऑफ़ स्टूडेंस ने किया था.
ये रैली रॉयल मेलबर्न हॉस्पीटल से शुरू हुई जहाँ भारतीय छात्र श्रवण कुमार गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं. उन पर पेचकस से हमला किया गया था.
एक अन्य छात्र बलजिंदर सिंह को भी चाकू मारा गया था और वे भी अस्पताल में भर्ती हैं.
अस्पताल के बाहर एकत्र हुए छात्रों ने पार्लियामेंट तक मार्च किया. इस दौरान छात्र नस्लवादी हिंसा के शिकार छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे.
ये छात्र 'सेव आवर स्टूडेंट्स' (हमारे साथी छात्रों को बचाओ) और 'स्टॉप रेसिस्ट वायलेंस' (नस्लवादी हिंसा को रोको) जैसे तख्तियाँ लिए हुए थे.
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय छात्रों पर हमलों के कई मामले सामने आए हैं जिसे लेकर छात्र काफ़ी चिंतित है. छात्रों का कहना है कि ये नस्लवादी हमले हैं.
भारत में नाराज़गी
पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भारतीय छात्रों को निशाना बनाकर उनके घर पर कथित रूप से ऑस्ट्रेलियाई हमलावरों ने हमला किया था जिसमें चार भारतीय छात्र घायल हो गए थे.
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रड से फ़ोन पर बात कर भारतीय छात्रों पर हुए हमले पर अपनी चिंता ज़ाहिर की थी.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी शुक्रवार को दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त जॉन मैकार्थी को बुलाकर नाराज़गी जताई थी.
लेकिन उनका कहना था कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हुए सभी हमले नस्लभेदी नहीं कहे जा सकते.
भारत की उच्चायुक्त सुजाता सिंह ने भी ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों से मुलाक़ात की थी.
इधर फ़िल्मस्टार अमिताभ बच्चन ने भी कहा है कि ताज़ा हालात देखते हुए वे ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी की ड्रॉक्ट्रेट की मानद उपाधि नहीं लेना चाहते.
उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा है, "मैंने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हुए हमलों के बारे में पूरे दिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ख़बरें अफ़सोस और सदमे के साथ देखी हैं."


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