मनमोहन ने कमला दास के निधन पर शोक जताया (लीड-1)

अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि नारीवादी और महिलाओं के अधिकारों से संबंधित कविताओं ने उन्हें आधुनिक भारत की प्रसिद्ध कवयित्रियों में से एक की पहचान दी।

कमला दास की उपलब्धियां कविता के क्षेत्र से आगे हैं। उन्होंने चित्रकारी और लेखन में कौशल दिखाया। महिलाओं से जुड़े मुद्दों, बच्चों और राजनीति पर उनके स्तंभ सभी को छूते थे।

मलयालम और अंग्रेजी की जानी-मानी साहित्यकार कमला दास का रविवार को पुणे में निधन हुआ। वह 75 वर्ष की थीं।

कमला मधुमेह से पीड़ित थीं और हाल ही में न्यूमोनिया की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनके परिवार से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इस मशहूर लेखिका ने पुणे के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

कोलकाता में 31 मार्च, 1934 को कमला का जन्म वी. एम. नायर और बालमणि अम्मा के यहां हुआ था। उनका बचपन कोलकाता में बीता। कमला का विवाह अपने से 15 वर्ष बड़े माधव दास से हुआ था। उनके तीन पुत्र हैं जिनमें से बड़े पुत्र एम. डी. नलपत पत्रकार हैं।

कमला को पहली बार उनकी जीवनी 'माई स्टोरी' से शोहरत मिली। उस समय वह 42 वर्ष की थीं। वह अंग्रेजी साहित्य में अपनी 'द सिरेंस', 'समर इन कलकत्ता' और 'पद्मावती द हारलॉट एंड अदर स्टोरीज' जैसी रचनाओं के लिए विख्यात हैं।

मलयालम साहित्य में उन्होंने 'पक्षीयिदू मानम', 'नरिचीरुकल पारक्कु म्बोल' और 'थानुप्पू' जैसी कई रचनाओं से अमूल्य योगदान दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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