बिहार में अपहरण की घटनाओं ने पुलिस की नींद उड़ाई
पिछले एक सप्ताह में राज्य में अपहरण के चार मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से दो लोगों के शव पुलिस ने बरामद कर लिए हैं, जबकि दो लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
राजधानी के कंकड़बाग थाना क्षेत्र से गुरुवार को अगवा नौ वर्षीय सत्यम का शव शुक्रवार को पुलिस ने बरामद कर लिया। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया। लेकिन पटना से ही 23 मई से लापता सत्येन्द्र सिंह का अब तक कोई सुराग पुलिस को नहीं मिल सका है। यद्यपि पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आऱ मल्लार विज्जी ने कहा कि जल्द ही सत्येन्द्र सिंह का पता चल जाएगा।
उधर, बेतिया से अगवा इंटरमीडिएट के छात्र जितेन्द्र कुमार का शव भी पुलिस ने शनिवार को गोपालपुर क्षेत्र से बरामद कर लिया। जितेन्द्र का अपहरण गत मंगलवार को किया गया था और अज्ञात अपहरणकर्ताओं ने जितेन्द्र के परिजनों से 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी।
मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाना क्षेत्र से एक चिकित्सक सुधीर कुमार के नौ वर्षीय पुत्र ऋतिक को अगवा हुए पांच दिन गुजर चुके हैं परंतु अब तक उसका कुछ पता नहीं चल सका है। मुजफ्फरपुर के पुलिस अधीक्षक सुधांशु कुमार का कहना है कि ऋतिक के अपहरण के मामले में चिकित्सक के कंपाउंडर चन्द्रशेखर साहनी सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने दावा किया है कि जल्द ही ऋतिक को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त करा लिया जाएगा।
अचानक अपहरण की बढ़ती घटनाओं के बाद राजनीति भी प्रारंभ हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद राम कृपाल यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार के सुशासन के पोल खुल गई है। आज बिहार के लोग अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्यम की हत्या पर दुख प्रकट करते हुए इस बात से इंकार किया कि बिहार में अपहरण की घटनाओं में वृद्घि हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई यह दावा तो नहीं कर सकता है कि आपराधिक घटनाएं नहीं होंगी परंतु मेरे शासनकाल में ऐसी घटनाओं के बाद कार्रवाई भी होगी।
उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार के बिहार की सत्ता संभालने के बाद अपहरण की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक राज्य भर में वर्ष 2005 में फिरौती के लिए अपहरण के 251 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2006 में सिर्फ 194 मामले ही दर्ज किए गए। इसी तरह वर्ष 2007 में फिरौती के लिए अपहरण के 89 मामले सामने आए, जबकि 2008 में 66 मामले ही दर्ज हुए। इस वर्ष अप्रैल तक अपहरण के 19 मामले दर्ज किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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