'आस्ट्रेलिया में नस्लीय टिप्पणियां आम'
चंडीगढ़, 30 मई (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया में रहने वाले और वहां से दुखद यादों के साथ वापस लौटे भारतीयों का कहना है कि भारतीय छात्रों पर नस्लीय टिप्पणियां वहां आम हैं और हाल ही में उन पर हुई हमलों की घटनाएं नई नहीं हैं।
मेलबर्न और सिडनी में भारतीय छात्रों पर हमले की घटनाओं से कई छात्रों का सपना टूट जाता है और वे उच्च अध्ययन को बीच में ही छोड़ने को बाध्य होते हैं।
प्रबंधन का पाठ्यक्रम बीच में ही छोड़कर भारत वापस लौटने वाले निशांत जैन ने आईएएनएस से कहा कि उन्होंने केवल दो महीनों में सिडनी इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वे वहां के हिसाब से ढल नहीं पा रहे थे। निस्संदेह आपको बराबरी का अधिकार और अन्य सभी विशेषाधिकार है लेकिन कई अवसरों पर गोरे लोग आपकी एशियाई उत्पत्ति को निशाना बनाते हैं।
पंजाब के जीरकपुर के निवासी जैन ने कहा कि शहरों की अपेक्षा उपनगरों में हालात और खराब हैं, जहां नस्लीय टिप्पणियां आम हैं और समस्या यह है कि आप कुछ नहीं कर सकते।
अपने बेटे को उच्च शिक्षा के लिए आस्ट्रेलिया भेजने की योजना बना रहे बैंक अधिकारी सतपाल शर्मा ने अपनी तैयारी रोक दी है। शर्मा ने आईएएनएस से कहा,"मेरे बेटे ने इस वर्ष 12 वीं पास की है और मैं उसे उच्च अध्ययन के लिए आस्ट्रेलिया भेजना चाहता था। इसके लिए सिडनी और मेलबर्न के चार-पांच संस्थानों में आवेदन भी किया था लेकिन अब मैं इस बारे में काफी आशंकित हूं।"
आस्ट्रेलिया में हमले के शिकार बने बलजिंदर सिंह के पिता मेवा सिंह ने कहा कि उनको हमले की सूचना बेटे से नहीं मिली। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके बेटे के साथ विदेश में ऐसी घटना होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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