पाकिस्तान के लिए नाकाफी है अमेरिकी मदद : पाकिस्तानी अखबार
यह राय पाकिस्तान के एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ने शनिवार को प्रकाशित अपने संपादकीय में व्यक्त की है।अमेरिका ने अगले पांच साल तक पाकिस्तान को सालाना 70 करोड़ डॉलर की सहायता देने की पेशकश की है।
एक अन्य संपादकीय में आतंकवाद के खिलाफ जारी युद्ध की वजह से पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवादी हमलों की ओर संकेत करते हुए कहा गया है कि आतंकवाद की जड़ मिटाए बिना देश में आत्मघाती हमलावरों और आतंकवादियों का पनपना समाप्त नहीं हो सकता।
ये संपादकीय लाहौर और पेशावर में
हमलों और अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रमुख डेविड पैट्रियस की यात्रा के मद्देनजर लिखे गए हैं। दोनों शहरों के हमलों में 40 से ज्यादा लोग मारे गए और कई घायल हो गए थे। पेट्रियास की यात्रा को भी अमेरिका द्वारा आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के मद्देनजर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
समाचार पत्र 'द न्यूज' ने अपने संपादकीय में लिखा है, "जनरल पेट्रियस हम आपको पूरे सम्मान के साथ बताना चाहते हैं कि यह 70 करोड़ डॉलर की सालाना मदद बहुत मामूली है।"
संपादकीय में कहा गया है कि आमदनी के नुकसान, देश में पहले से मौजूद 17 अफगान शरणार्थियों की संख्या में वृद्धि तथा पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के 30 लाख शरणार्थियों के कारण इस लड़ाई पाकिस्तान को जो कीमत चुकानी पड़ रही है वह अमेरिकी की ओर से दिए जाने वाले 70 करोड़ डॉलर से कहीं ज्यादा है। संपादकीय में कहा गया है कि यहां दोबारा आइएगा और अगली बार इससे कुछ बेहतर की पेशकश कीजिएगा।
संपादकीय में कहा गया है कि तालिबान प्रत्येक सूबे में सक्रिय है और दक्षिणी पंजाब तथा बलूचिस्तान के हिस्सों में की इसकी मौजूदगी काफी प्रबल है।
उधर समाचार पत्र 'डॉन' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि आतंकवाद की जड़ मिटाए बगैर देश में आत्मघाती हमलावरों और आतंकवादियों का पनपना कभी बंद नहीं होगा। समाचार पत्र ने पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में जारी सैन्य अभियान तथा संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र (एफएटीए) में प्रस्तावित इसी तरह सैन्य अभियान को सही ठहराया है। पत्र ने सलाह दी है कि सैन्य विकल्प कारगर होना चाहिए तथा खुफिया सूचनाएं जुटाने और शहर में पुलिस व्यवस्था मजबूत बनाने में तेजी लाई जानी चाहिए।
सुरक्षा बलों ने 26 अप्रैल से पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में सैन्य अभियान शुरू कर दिया था। सेना का कहना है कि इस अभियान में अब तक करीब 1200 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। हालांकि इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है क्योंकि संघर्ष वाले इलाकों में मीडिया को प्रवेश की इजाजत नहीं है। इस अभियान में सुरक्षा बलों के 70 जवानों को भी जान गंवानी पड़ी है।
इस सैन्य कार्रवाई की वजह से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने विस्थापितों की संख्या 29 लाख बताई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विस्थापितों के राहत और पुनर्वास के लिए 54 करोड़ 30 लाख डॉलर की जरूरत होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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