आर्सेलर मित्तल को जमीन देने का झारखंड के ग्रामीणों द्वारा विरोध
ये ग्रामीण जिनमें से अधिकांश किसान है,ं आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच (एएमएआरएम) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
आर्सेलरमित्तल ने 1.2 करोड़ टन उत्पादन क्षमता वाले इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए खूटी और गुमला जिलों में 11,000 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए चिह्न्ति की है।
एएमएआरएम के समन्वयक दयामणि बारला ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया, "सरकार ने ग्रामसभा के कब्जे वाली जमीन कंपनी को हस्तांतरित की है। उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है। सरकार का यह कदम छोटानागपुर टीनेंसी एक्ट (सीएनटी) का उल्लंघन है। सीएनटी एक्ट के अंतर्गत जनजातीय इलाके की जमीन गैर जनजातियों को हस्तांतरित नहीं की जा सकती।"
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए आर्सेलरमित्तल को 15.55 करोड़ रुपये जमा करने को कहे हैं जिसमें से 12.29 करोड़ रुपये जमा कराए जा चुके हैं।
कंपनी को राज्य में कोयला ब्लॉक और लौह अयस्क खानें आवंटित की जा चुकी हैं। झारखंड में करीब 12 ग्रीनफील्ड इस्पात परियोजनाओं को भूमि अधिग्रहणा के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है एक बार सरकारी जमीन मिल जाने के बाद कंपनी बेहतर मुआवजा देकर ग्रामीणों से भी उनकी जमीन ले सकती है। यही वजह है कि एएमएआरएम इसका विरोध कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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