प्रभाकरण के माता-पिता मिले

श्रीलंकाई सेना ने कहा है कि एलटीटीई के मारे गए नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरण के माता-पिता विस्थापितों के लिए बनाए गए एक शिविर में रह रहे हैं और स्वस्थ है.
सेना के मुताबिक थिरुवेंगड़म वेलुपिल्लई और उनकी पत्नी पार्वती की उम्र 70 साल है और वे वावूनिया के पास मेनिक फ़ार्म में विस्थापितों के लिए बने एक शिविर में मिले हैं. सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानयक्कारा ने कहा, "वे सुरक्षित हैं और उनका स्वास्थ्य ठीक है."
उनके पारिवारिक मित्र उनकी सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे. उनका कहना था कि वे विद्रोहियों के संघर्ष में शामिल नहीं थे. ब्रिगेडियर उदय नानयक्कारा ने कहा की इस दंपती को भोजन और शरण जैसी बुनियादी सुविधाएँ मुहैया कराई जा रही हैं.
विस्थापितों के शिविर में
उन्होंने कहा, "अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि वे शिविर में कब पहुँचे और वे अन्य विस्थापितों की तरह शिविर में तब तक रह सकते हैं जब तक कि वे कहीं और बस नहीं जाते हैं."
अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि वे शिविर में कब पहुँचे और वे अन्य विस्थापितों की तरह शिविर में तबतक रह सकते हैं जबतक कि वे कहीं और बस नहीं जाते हैं ब्रिगेडियर उदय नानयक्कारा, प्रवक्ता सेना
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उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि प्रभाकरण के माता-पिता से पूछताछ नहीं की जाएगी. ब्रिटेन में प्रभाकरण के दोस्तों ने इस बात की पुष्टि की कि दंपती को तलाश लिया गया है.
उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत में 10 साल तक ख़ुद ही निर्वासित जीवन बिताने के बाद यह दपंती 2003 में श्रीलंका लौट आया था.
सुरक्षा की चिंता
लंदन में इस परिवार के एक मित्र ने बीबीसी को बताया, "सरकार के इस आश्वासन के बाद भी कि उन्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया जाएगा या बुरा व्यवहार नहीं किया जाएगा, हम सेना के हाथों उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे."
सेना ने कहा है कि प्रभाकरण के बेटे चार्ल्स एंथनी इस महीने के शुरू में उत्तरी भाग में हुई लड़ाई में मारे गए थे लेकिन अभी प्रभाकरण की पत्नी, पुत्री और अन्य पुत्रों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है. इस परिवार के मित्रों ने लंदन में बताया कि प्रभाकरण के माता-पिता श्रीलंका में तमिल ईलम के लिए हुए संघर्ष में शामिल नहीं थे.
ऐसा माना जाता है कि प्रभाकरण के एक भाई लंदन में और एक बहन कनाडा में रह रही हैं. उनके तीसरे भाई या बहन के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है कि वे ज़िंदा हैं या नहीं.


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