भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत

विकास दर के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज़ी आई है. इस ख़बर से शेयर बाज़ार में ज़बर्दस्त उछाल आया है.
इसके मुताबिक वैश्विक मंदी ने दुनिया के अन्य देशों की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाला है लेकिन जनवरी 2009 के बाद की तस्वीर कुछ सुधरी हुई दिखाई पड़ती है.
जनवरी से लेकर मार्च के बीच जीडीपी दर 5.8 फ़ीसदी रही जबकि इससे पहले अक्तूबर से दिसंबर के बीच यह आँकड़ा 5.3 फ़ीसदी थी. माना जा रहा है कि बाज़ार में नकदी बढ़ाने की नीति का असर हुआ है
हालाँकि पूरे वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान विकास दर 6.7 फ़ीसदी रही जबकि इससे पिछले साल ये आँकड़ा 8.8 फ़ीसदी का था. कंस्ट्रक्शन, कृषि और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार आया है. कंस्ट्रक्शन क्षेत्र इस दौरान 6.8 फ़ीसदी की गति से बढ़ा जबकि तीसरी तिमाही में ये आँकड़ा 4.2 था.
कृषि क्षेत्र ने इस दौरान ढाई फ़ीसदी से ज़्यादा की प्रगति दर्ज कराई. बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भी तेज़ी आई है. माना जा रहा है कि ब्याज दरें कम करने और बाज़ार में ऋण देने के सरकारी प्रोत्साहन का असर दिखाई दे रहा है.
शेयर बाज़ार ऊपर
शुक्रवार सुबह ये आँकड़े जारी होते ही भारतीय शेयर बाज़ारों में तेज़ी का रुख़ देखा गया. चुनाव परिणाम के बाद भारीय शेयर बाज़ारों में तेज़ी आई है
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक सेंसेक्स लगभग साढ़े तीन सौ अंक चढ़ कर 14 हज़ार 650 के आस-पास कारोबार कर रहा है. सेंसेक्स में शामिल तीस कंपनियों के शेयरों में बीस से ज़्यादा के भाव ऊपर चल रहे हैं.
यही हाल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ़्टी का है. ये लगभग 110 अंक ऊपर चार हज़ार 445 के आस-पास कारोबार कर रहा है.
चुनाव परिणाम आने के बाद भारतीय शेयर बाज़ारों ने जो तेज़ी दिखाई थी वो अभी कायम है. पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी भारतीय शेयर बाज़ार में निवेश बढ़ाया है.


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