वाजपेयी यदि सक्रिय होते तो भाजपा की यह गत नहीं होती : ब्रजेश मिश्र

हिन्दी साप्ताहिक आउटलुक को दिए एक साक्षात्कार में मिश्र ने कहा, "इसमें शक नहीं कि अटलजी के चुनाव में सक्रिय न होने से भाजपा को नुकसान हुआ है। अब तो भाजपा के नेता भी यह मान रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "यदि अटलजी सक्रिय होते तो भले ही भाजपा सत्ता में न आती लेकिन जितनी बुरी तरह से पार्टी हारी है, उस तरह नहीं हारती। भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का जो अंतर है वह निश्चित रूप से वह कम होता।"

उन्होंने कहा, "भाजपा को अब अपना एजेंडा बदल देना चाहिए। हिन्दुत्व को एजेंडे से बाहर निकाल देना चाहिए या नहीं, यह भाजपा को तय करना है। नतीजों से सबक लेकर भाजपा को अपनी दिशा तय करनी चाहिए।"

उन्होंने माना कि चुनाव में नकारात्मक प्रचार भाजपा को ले डूबा। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधानमंत्री कहना भी भाजपा का नकारात्मक प्रचार था। 'मजबूत नेता, निर्णायक सरकार' के नारे से उसने यही साबित करने की कोशिश की कि सामने वाला कमजोर है। लोगों को यह सब पसंद नहीं आया।"

उन्होंने कहा, "मैं तो पार्टी में नहीं हूं लेकिन मैं चाहता हूं कि भाजपा आगे बढ़े। क्योंकि इस देश में दो दलीय व्यवस्था की बहुत जरूरत है। क्षेत्रीय दलों की दादागिरी रोकने के लिए दोनों राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भाजपा को आगे आना होगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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