फ़ाल्कन भारतीय वायु सेना में शामिल

इसराइल निर्मित पूर्व चेतावनी देने वाला फ़ाल्कन रडार सिस्टम भारतीय वायु सेना में शामिल हो गया है. इससे देश की निगरानी क्षमताओं में इज़ाफ़ा होगा.

फ़ाल्कन के शामिल हो जाने से भारत दक्षिण एशिया का ऐसा पहला देश बन गया है, जिसके पास इस प्रकार का अत्याधुनिक रडार सिस्टम है. माना जा रहा है कि इस रडार सिस्टम के वायु सेना में शामिल हो जाने से देश की निगरानी क्षमताओं में इज़ाफ़ा होगा.

गुरुवार को रक्षा मंत्री एके एंटनी ने दिल्ली स्थित पालम एयरबेस पर इस रडार व्यवस्था को अधिकारिक रुप से वायु सेना में शामिल किया.

भारत-इसराइल-रुस की कोशिश

इसराइली एयरक्राफ़्ट इंडस्ट्रीज़ के ज़रिए निर्मित फ़ाल्कन रडार सिस्टम रुस के बनाए गए रूसी इलिशिन-76 वायुयान पर लगाया गया है. ये रडार सिस्टम वर्ष 2004 में इसराइस और रुस के साथ एक अरब दस करोड़ डॉलर के एक समझौते के तहत भारत को मिला है. अभी दो और फ़ाल्कन भारत को मिलने हैं.

फ़ाल्कन रडार सिस्टम ज़मीन और आकाश में सैन्य गतिविधियों पर नज़र रखता है. ये 400 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन की तरफ़ से आते हुए यान का पता लगा लेता है. ये रडार सिस्टम हर मौसम में काम करता है और हर तरह के वायु-यानों की पहचान करने की क्षमता रखता है.

ग़ौरतलब है कि अब तक अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, इसराइल और ऑस्ट्रेलिया के पास इस तरह के अत्याधुनिक रडार सिस्टम हैं. हालाँकि पाकिस्तान, ब्राज़ील और ग्रीस के पास भी पूर्व चेतावनी देने वाले रडार सिस्टम हैं, लेकिन वे इतने अत्याधुनिक नहीं है.

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