केन्द्रीय म्ांत्रिमंडल में बिहार की नुमाइंदगी करेंगी मीरा कुमार

पटना, 28 मई (आईएएनएस)। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद जहां बिहार के 12 सांसदों को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था वहीं वर्तमान में बिहार के सिर्फ एक ही सांसद को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिल पाया है। सासाराम से सांसद और प्रसिद्ध दलित नेता जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बिहार की एकमात्र प्रतिनिधि हैं।

विगत 23 मई को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब अपने मंत्रिमंडल का गठन किया था तो उसमें बिहार से मीरा कुमार शामिल थी। परंतु गुरुवार को हुए मंत्रिपरिषद के पहले विस्तार में बिहार के एक भी सांसद को शािमल नहीं किया गया। पूर्ववर्ती सरकार में मीरा कुमार सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थीं।

वर्तमान समय में बिहार के 40 लोकसभा सीटों में राजद ने चार सीटों पर कब्जा जमाया है जबकि कांग्रेस के दो और निर्दलीय उम्मीदवार भी दो सीटों पर विजयी घोषित हुए हैं। इस बीच बिहार से जीते दोनों निर्दलीय सांसद दिग्विजय सिंह तथा ओमप्रकाश सिंह ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को अपना समर्थन दिया है परंतु दोनों ही मंत्रिमंडल में स्थान नहीं बना पाए।

उल्ल्ेाखनीय है कि मनमोहन सिंह की पिछली मंत्रिपरिषद में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव रेल, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान रसायन, उर्वरक एवं इस्पात, राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह ग्रामीण विकास तथा मीरा कुमार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री थीं। वहीं डा़ शकील अहमद, मोहम्मद तस्लीमुद्दीन, मोहम्मद अली अशरफ फातमी, कांति सिंह, जय प्रकाशा नारायण यादव, डा़ अखिलेशा प्रसाद सिंह, प्रेमचंद गुप्ता (राज्यसभा सदस्य) तथा रघुनाथ झा राज्यमंत्री का पद संभाले हुए थे।

इधर, बिहार से एक ही मंत्री बनाये जाने पर कांग्रेस के प्रदेशा अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि बिहार के विकास पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और ना ही पूर्व में प्रारंभ की गई योजनाएं बंद होंगी। उन्होंने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि मंत्री बनाना प्रधानमंत्री का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि बिहार से कांग्रेस को दो ही सीटें मिली जिस कारण कम लोग मंत्री बन सके। हालांकि कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीते असरारूल हक कासमी को मंत्री नहीं बनाए जाने का अफसोस जरूर है। उन्होंने कहा कि असरारूल हक कासमी अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं, और अगर उन्हें मंत्री बना दिया जाता तो ज्यादा अच्छा रहता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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