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केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कम हुआ मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व

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भोपाल, 28 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें चार से बढ़कर 12 हो गईं लेकिन केंद्रीय मंत्रिपरिषद में राज्य का प्रतिनिधित्व पांच से घटकर चार हो गया है। इस बार तीन पुराने और एक नए चेहरे को प्रधानमंत्री मनमोहन सिह की मंत्रिपरिषद में जगह मिली है जिनमें से दो कैबिनेट और दो राज्यमंत्री बनाए गए हैं।

नवगठित मंत्रिमंडल में कमलनाथ और कांतिलाल भूरिया को कैबिनेट मंत्री के तौर पर जगह मिली है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरुण यादव राज्यमंत्री की हैसियत से शामिल किए गए हैं। यादव पहली बार मंत्री बने हैं जबकि तीनों सदस्य पूर्व सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। इनमें भूरिया का कद बढ़ा है। इस बार उन्हें राज्यमंत्री से पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है।

पिछले लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 29 में से सिर्फ चार सीटें ही जीती थी लेकिन मंत्रिपरिषद में पांच लोगों ने जगह पाई थी। इस बार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अर्जुन सिंह जगह नहीं हासिल कर पाए हैं वहीं पिछली सरकार में राज्यमंत्री रहे सुरेश पचौरी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभाले हुए हैं। पिछले कार्यकाल में मनमोहन सिंह सरकार में हंसराज भारद्वाज मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के तौर पर मंत्रिमंडल में थे। जब वे हरियाणा से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए तो मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई।

इस तरह पिछली सरकार में मध्य प्रदेश से पांच केंद्रीय मंत्री रहे हैं। राज्य की जनता ने पिछले चुनाव से कहीं ज्यादा इस बार कांग्रेस पर भरोसा जताया और उसकी सीटें चार से बढ़कर 12 हो गईं लेकिन मंत्रिपरिषद में राज्य का प्रतिनिधित्व जरूर घटा है।

कांग्रेस ने महाकौशल से कमलनाथ, चंबल से ज्योतिरादित्य और मालवा-निमाड़ से भूरिया व यादव को मंत्रिपरिषद में जगह देकर क्षेत्रीय स्तर पर मिली सफलता के अनुरूप प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। कांग्रेस ने मालवा-निमाड़ क्षेत्र की आठ में से छह सीटें जीती हैं और उसी के लिहाज से इस क्षेत्र के दो सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र इस बार प्रतिनिधित्व से वंचित रह गया है। पिछली सरकार में विंध्य इलाके के प्रतिनिधि के तौर पर अर्जुन सिंह केंद्रीय मंत्रिमंडल में थे।

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व घटने को कांग्रेस की प्रदेश इकाई के प्रमुख प्रवक्ता मानक अग्रवाल राज्य की उपेक्षा नहीं मानते। उनका कहना है कि पिछले चुनाव में कई अन्य राज्यों से कांग्रेस को पर्याप्त सफलता नहीं मिली थी लेकिन इस बार उन राज्यों में मध्य प्रदेश की ही तरह कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा है। लिहाजा वहां के भी प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में जगह मिलना जरूरी है। इसी वजह से इस बार मध्य प्रदेश से चार ही सदस्य मंत्रिमंडल में जगह पा सके है। इसे किसी भी कीमत में कम नहीं आंका जा सकता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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