नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने की सू की की रिहाई की मांग
करीब दो दशकों से नजरबंद लोकतंत्र समर्थक सू की को बुधवार को रिहा होना था लेकिन अब उन पर नजरबंदी के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मुकदमा चल रहा है। दोषी पाए जाने पर उन्हें पांच वर्ष की जेल की सजा हो सकती है।
म्यांमार के एक पूर्व सांसद टींट स्वे ने एक सम्मेलन में यहां कहा कि म्यांमार के लोगों की आवश्यकता पर भारत सरकार शांत और उदासीन है।
बर्मा की महिला लीग की थिन थिन अयुंग ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से आग्रह किया कि वह सू की को रिहा करने के लिए म्यांमार सरकार पर दबाव डालें।
समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली ने भी सभी नोबेल पुरस्कार विजेताओं को सू की के पक्ष में खड़ा होने का आवाह्न् किया।
पूर्व रक्षामंत्री जार्ज फर्नाडीज ने भी इस मामले पर तुरंत कदम उठाने को कहा।
म्यामांर में लोकतंत्र के लंबे समय से समर्थक रहे फर्नाडीज ने एक बयान में कहा,"यदि हम अपने आदर्शो का मजाक नहीं बनाना चाहते हैं तो हमें तत्काल उनकी रिहाई के लिए राजनयिक और सार्वजनिक दबाव डालना चाहिए।"
सू की की रिहाई की मांग के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री नंदिता दास भी सम्मेलन में उपस्थित थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications