लाहौर विस्फोट से इमारत ढही, 23 मरे (राउंडअप)

करीब 100 किलोग्राम विस्फोटकों से लदी कार में तिमंजिला रेस्क्यू-15 इमारत के बाहर विस्फोट हुआ। विस्फोट में इमारत ढह गई। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रांतीय मुख्यालय के समीप इस इमारत में आपात पुलिस बल का कार्यालय था।

घटनास्थल पर हेलीकाप्टरों को मंडराते और राहतकर्मियों को मलबे में फंसे लोगों को निकालते देखा गया। सुरक्षाकर्मियों ने आसपास की इमारतों की छतों पर पोजीशन ले रखी है।

हमले का ब्योरा देते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सज्जाद भुट्टा ने कहा कि एक कार आपात पुलिस बल और आईएसआई कार्यालयों के बीच आई। उसमें कई बंदूकधारी सवार थे। उन्होंने बताया, "कुछ लोगों ने वाहन से बाहर निकलकर आईएसआई कार्यालय की ओर गोलियां दागनी शुरू कर दीं। इमारत में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भी जवाबी गोलीबारी की।"

उन्होंने बताया कि गोलीबारी अभी चल ही रही थी कि तभी कार में धमाका हो गया। भुट्टा ने कहा कि विस्फोट में 23 लोग मारे गए। भुट्टा ने इससे पहले कहा था कि घटना में 40 लोगों की मौत हो गई है।

विस्फोट के बाद भी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गए और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

मुहम्मद अली नाम के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "धमाका होते ही मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। जिस तरह धमाका हुआ और गोलियों की बौछार हुई, उससे ऐसा लगा जैसे कोई जंग लड़ी जा रही हो।"

यह विस्फोट उस दिन किया गया जब जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद को करीब ही स्थित लाहौर उच्च न्यायालय में पेश किया जाना था।

द न्यूज वेबसाइट के अनुसार, "बम निरोधक दस्ते का कहना है कि कार बम विस्फोट में 100 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल किया गया।" वेबसाइट के अनुसार घटनास्थल से एक आत्मघाती जैकेट और एक हथगोला भी बरामद किया गया।

कराची में मौजूद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने विस्फोट के तुरंत बाद एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जिसमें सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई। जरदारी ने आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की।

प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि सरकार आतंकवाद को जड़ उखाड़ने के लिए कटिबद्ध है। उन्हों कहा कि जो भी इस हमले में शामिल रहे हैं वे सरकार के दुश्मन हैं।

गृहमंत्री रहमान मलिक ने कराची में संवाददाताओं से कहा है कि आतंकवादी देश के पश्चिमोत्तर में परास्त हो चुके हैं और अब उन्होंने लाहौर का रुख किया है। उन्होंने कहा कि हमें इस तरह के हमले का पहले से ही अंदेशा था।

उन्होंने कहा कि पश्चिमोत्तर में शिकस्त खा रहे आतंकवादी हताश होकर अब शहरों में फैल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि तालिबानी आतंकवादियों द्वारा विवादास्पद शांति समझौते का उल्लंघन किए जाने के बाद पाकिस्तानी सेना ने 26 अप्रैल को उनके खिलाफ पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।

पंजाब प्रांत की सरकार ने अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (जांच) जफर मजीद के नेतृत्व में आतंकी हमले की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया है।

गत 3 मार्च को आतंकवादियों ने लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों पर हमला किया था। इस हमले में सात खिलाड़ी और टीम के सहायक कोच घायल हो गए थे और उनकी हिफाजत में तैनात छह पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इस हमले के एक ही महीने बाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने लाहौर के बाहरी हिस्से में मनावां पुलिस प्रशिक्षण अकादमी पर हमला किया था।

उधर विस्फोट में घायल हुए लोगों का इलाज कर रहे अस्पतालों को पुलिस ने उन्हें छुट्टी नहीं देने की हिदायत दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घायलों को जांच के बाद छुट्टी दे दी जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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