भारत के अंतरिक्ष मिशन को अंजाम देंगे वायुसेना पायलट
वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर ने संवाददाताओं से कहा, "मेरा आपसे एक वादा है, यदि कोई भारतीय व्यक्ति चांद (अंतरिक्ष पढ़ें) पर पहुंचेगा तो वह भारतीय वायुसेना से ही होगा।"
सूत्रों के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सहायता से वायुसेना अपने दो लोगों को अभियान के लिए प्रशिक्षण दे रही है।
मेजर ने कहा कि वायुसेना का एयरोस्पेस मेडिसिन इंस्टीट्यूट इसरो के नजदीकी सहयोग से परियोजना पर काम कर रहा है।
अभियान में चालक दल के दो लोगों को अंतरिक्ष में ले जाने की संभावना है। भारतीय वायुसेना के स्क्वोड्रन लीडर राकेश शर्मा पूर्व सोवियत संघ के साथ संयुक्त अभियान में वर्ष 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय व्यक्ति थे।
यद्यपि इसरो चाहता है कि वायुसेना के एक पायलट के साथ उसका एक वैज्ञानिक अंतरिक्ष में जाए लेकिन वायुसेना का प्रस्ताव है कि दोनों व्यक्ति वायुसेना से ही होने चाहिए।
वायुसेना के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि इसरो एक पायलट के साथ एक वैज्ञानिक को अंतरिक्ष में भेजने पर जोर दे रहा था लेकिन हमने अपने एक इंजीनियर को मिशन पूरा होने तक प्रशिक्षण के लिए नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है।
भारत की महत्वाकांक्षी 25 अरब डॉलर की योजना के अनुसार दो लोगों को सात दिनों के लिए धरती से 274 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यदि अभियान पूरा हुआ तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद अंतरिक्ष में मानव भेजने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा।
ईरान ने भी वर्ष 2021 तक मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान भेजने का प्रयास करने की घोषणा की है।
इस अभियान में भारी रकम खर्च होने की आलोचना को खारिज करते हुए वायुसेना के ही एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इससे भारत को अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) क्षमता हासिल करने में मदद मिलेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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