बेहतर प्रशासन के लिए एक मंच पर आईं 600 महिला पंचायत सदस्य

सुग्राम एक ऐसा महासंघ है जो महिला पंचायत सदस्यों के अधिकार को हासिल करने और ग्रामीणों के हितों के लिए काम करेगा।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर हंगर प्रोजेक्ट की भारत निदेशक रीता सरीन ने कहा, "सुग्राम न केवल भारत बल्कि दक्षिण एशिया में पहला ऐसा संगठन है जो महिला पंचायत सदस्यों के अधिकारों और उनके हितों की बात करता है, बल्कि एक तरह से यहां इतिहास लिखा जा रहा है। "

सुग्राम के संचालन और उसके कार्यो को सुगम बनाने में हंगर प्रोजेक्ट मदद कर रहा है। हंगर प्रोजेक्ट इस कार्य के लिए स्वीडिश एसोसिएशन आफ लोकल अथारिटीज एंड रीजन्स (एसकेएल) एवं इंटरनेशनल एंड स्वीडिश इंस्टीट्यूट फार पब्लि एडमिनिस्ट्रेशन (एसआईपीयू) से सहयोग ले रहा है।

सरीन ने कहा, "सुग्राम के पीछे उद्देश्य निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्यों को सशक्त बनाने के साथ ही लैंगिक बराबरी और समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाना शामिल है।"

उन्होंने कहा कि अगर चुनी हुईं ग्राम पंचायत सदस्य सशक्त बनती हैं तो ग्राम पंचायतों के संपूर्ण विकास में उनका योगदान और उपयोगी होगा।

सुग्राम की 22 सदस्यीय संचालन समिति है जो कि 21 जिलों से आते हैं। ये 22 सदस्य जिलों में अपने ब्लाक स्तर के संघ का प्रतिनिधित्व करती हैं। सुग्राम का कार्य सुचारू चलता रहे इसके लिए सुग्राम के कार्यालय में सात लोगों की नियुक्ति की गई है।

चिकबल्लापुरा जिले के गोवरीविदानुर ब्लाक का प्रतिनिधित्व करने वाली सुग्राम की अध्यक्ष रेणुका ने कहा कि कर्नाटक की महिला पंचायत सदस्य अपने क्षेत्रों में बदलाव के साथ-साथ पानी, बिजली, सफाई, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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