लिट्टे ने प्रभाकरन की मौत स्वीकारी

समाचार चैनल 'अल जजीरा' ने लिट्टे के विदेशी मामलों के प्रमुख एस.पद्मनाथन के हवाले से कहा कि श्रीलंका सेना के खिलाफ लड़ाई में उसके सर्वोच्च कमांडर की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रभाकरन ने तमिल लोगों की स्वतंत्रता हासिल करने तक संघर्ष जारी रखने का अंतिम आग्रह किया था।
प्रभाकरण के जीवित होने का दावा किया था
इससे पहले पद्मनाथन ने प्रभाकरन की मौत के एक दिन बाद 19 मई को अपने पहले बयान में कहा था, "अंतर्राष्ट्रीय तमिल समुदाय को सूचित करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि हमारा नेता जीवित और सुरक्षित है। वह तमिलों के सम्मान और स्वतंत्रता के आंदोलन का नेतृत्व करता रहेगा।"
लिट्टे समर्थक वेबसाइट 'तमिलनेट' ने खुफिया शाखा के एक अनजान सदस्य के हवाले से कहा था," हमें विश्वास है कि हमारा नेता जीवित है और वह उचित समय पर लोगों से संपर्क करेगा।" लिट्टे समर्थक अन्य वेबसाइटों ने भी ऐसा ही रुख अपनाया।
पश्चिमी देशों के तमिल लोगों को विश्वास नहीं था
हजारों तमिल समर्थक खासकर पश्चिमी देशों में रहने वालों का मानना था कि प्रभाकरन ने अंतिम समय में सेना की घेरेबंदी को तोड़ दिया था और उसकी मौत की तस्वीरें तथा वीडियो फुटेज जाली हैं।
परंतु पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों और राजनयिकों का मानना है कि प्रभाकरन की मौत हो चुकी है। यद्यपि इस बात को लेकर संदेह बना हुआ है कि उसकी मौत कैसे हुई। कोलंबो स्थित एक पश्चिमी राजनयिक ने टेलीफोन से कहा, "हमें प्रभाकरन की मौत के बारे में कोई संदेह नहीं है। वह मर चुका है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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