मप्र बोर्ड परीक्षाओं में खराब नतीजों की गाज महकमे पर
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हायर सेकेन्डरी (12वीं) और हाई स्कूल (10वीं) परीक्षाओं के नतीजे अपेक्षा के अनुरूप नहीं आए हैं। इन परिणामों की समीक्षा के लिए राजधानी में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरों की एक बैठक बुलाई गई।
शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने अधिकारियों के साथ विचार विमर्श करने के बाद निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों के नतीजे अच्छे रहे हैं उनके शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाए वहीं खराब नतीजे देने वाली स्कूलों के प्राचार्य एवं अधिकारियों को दंडित किया जाए।
शिक्षा मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय के मुताबिक शत प्रतिशत परिणाम देने वाले उत्कृष्ट विद्यालयों के समस्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों को एक माह का अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। 95 से 100 प्रतिशत तक परिणाम देने पर 15 दिन का अतिरिक्त वेतन, 90 से 95 प्रतिशत परिणाम देने पर प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। जिन विद्यालयों के 80 से 75 प्रतिशत तक परिणाम रहा है उन्हें चारित्रिक चेतावनी के साथ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और 75 प्रतिशत से कम परिणाम पर एक वेतन वृद्धि रोकने के संबंध में कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा।
इसी तरह अन्य शासकीय विद्यालयों में जहां नतीजे 80 प्रतिशत तक रहे हैं वहां के सभी कर्मचारियों को एक माह का अतिरिक्त वेतन, 70 से 80 प्रतिशत का परिणाम देने पर 15 दिन का वेतन और 60 से 70 प्रतिशत तक परिणाम देने पर प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। जिन विद्यालयों को नतीजे अच्छे नहीं रहे है उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी होगा। इसके अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी और संभागीय संयुक्त संचालकों के दायित्व भी तय किए गए हैं। जिन संभागों के नतीजे 20 से 25 प्रतिशत रहे हैं उनकी दो वेतन वृद्धि रोके जाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा पूर्व में की गई घोषणा के मुताबिक 12वीं की परीक्षा में 85 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर के लिए 35 हजार रुपए दिए जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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