उत्तर कोरिया ने किया परमाणु परीक्षण, भारत ने की निंदा (लीड-3)
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी केसीएनए ने कहा, "यह परीक्षण आत्म रक्षा के लिए न्यूनतम परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के मद्देनजर किया गया है। परमाणु परीक्षण करना हमारे वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की मांग थी।"
सरकारी एजेंसी ने यह भी कहा, "यह परीक्षण सुरक्षित तरीके से किया गया। परीक्षण संतोषजनक रहा है।"
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने खबर दी कि उत्तर कोरिया ने दक्षिणी होमक्योंग प्रांत के 'मुसुदानरी' प्रक्षेपण केंद्र से 130 किलोमीटर मारक क्षमता वाली मिसाइल का भी प्रक्षेपण किया। सूत्रों ने बताया कि मिसाइल प्रक्षेपण के मसले पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर समीक्षा कर रहे हैं।
उत्तर कोरिया ने यह दूसरा परमाणु परीक्षण किया है। उल्लेखनीय है कि उसने अक्टूबर, 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया था। दूसरे परमाणु परीक्षण का केंद्र पहले वाले से 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर है।
दक्षिण कोरियाई सरकार के प्रवक्ता ली डोंग क्वोन ने भी परीक्षण की पुष्टि की। उन्होने कहा, "परीक्षण की वजह से दक्षिण कोरिया के हमक्योंग प्रांत में स्थानीय समयानुसार सुबह 9.54 बजे कृत्रिम भूकंप के झटके महसूस किए गए।"
सियोल के मौसम विभाग ने बताया कि परीक्षण की वजह से आए कृत्रिम भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 मापी गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वे ने भी इसकी तीव्रता 4.7 बताई है।
उधर, अमेरिका विदेश विभाग ने कहा कि परमाणु परीक्षण के सबंध में आ रही खबरों पर वह नजर रखे हुए है लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "हम उत्तर कोरिया के दावे से चिंतित हैं। हम ब्यौरे का विश्लेषण कर रहे हैं। हम सुरक्षा परिषद से सहयोगियों से अगले कदम के बारे परामर्श कर रहे हैं।"
उत्तर कोरिया द्वारा सोमवार को किए गए परमाणु परीक्षण की भारत ने भी निंदा की है। भारत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय करार दिया है।
विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने कहा, "हमने परीक्षण के बारे में सुना है। यह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का सीधा उल्लंघन है। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं। इस परीक्षण का क्षेत्र की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।"
इससे पहले भारतीय रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने सोमवार को पदभार ग्रहण करने बाद कहा, "यह गहरी चिंता का विषय है। भारत परमाणु प्रसार के खिलाफ है। यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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