मध्य प्रदेश के 36 जिलों में बाढ़ का खतरा

भोपाल, 25 मई (आईएएनएस)। सूखे की मार झेल रहे मध्य प्रदेश के 36 जिले ऐसे हैं जिनपर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। संभावित बाढ़ से उत्पन्न होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर रणनीति बनाने की पहल तेज हो गई है।

वैसे तो प्रदेश बाढ़ की आपदा से प्रभावित होने वाला क्षेत्र नहीं है परंतु वर्षा के दौरान कम समय के लिए प्रमुख नदियों में बाढ़ आती है। नदियों में अधिक पानी आने के चलते जल ग्रहण क्षेत्रों और इन नदियों पर बने बांध पानी से लबालब भर जाते हैं। इस स्थिति में बाधों से पानी को छोड़ना पड़ता है, जिससे बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है। पिछले 26 सालों में प्रदेश के 36 जिलों में छह से 12 बार बाढ़ की स्थिति बनी।

प्रदेश के राहत आयुक्त मदन मोहन उपाध्याय ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे बाढ़ से बचाव और राहत के लिए जिला स्तर पर एक्शन प्लान बनाए। ताकि अतिवृष्टि अथवा बाढ़ की स्थिति में एक्शन प्लान के मुताबिक कार्रवाई की जा सके।

सरकारी तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 50 जिलों में से 36 जिले ऐसे है जहां पिछले 26 वर्षो के दौरान छह से 12 बार बाढ़ आई। ग्वालियर, मुरैना, मंदसौर, गुना, बुरहानपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, दमोह, विदिशा, खंडवा, देवास, रायसेन, मंडला, छिन्दवाडा, बैतूल, रतलाम, खरगौन, धार, बालाघाट, सतना रीवा, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, हरदा, बड़वानी, श्योपुरकला, नीमच, कटनी, डिन्डोरी, राजगढ़, अशोक नगर, शाजापुर और इंदौर वे जिले है, जहां बाढ़ का खतरा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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