'प्रभाकरण का अंतिम संस्कार हुआ'

श्रीलंकाई सेना प्रमुख सारथ फोंसेका ने यह जानकारी देते हुए कहा कि 54 वर्षीय प्रभाकरण के शव की पहचान मंगलवार की सुबह हो गई थी। उससे पहले उत्तर-पूर्वी मुलाइटिवू जिले में भीषण युद्ध चला था, जिसमें प्रभाकरण व उसके परिवार के सदस्यों की मौत हो गई।
उनहोंने बताया कि प्रभाकरण के शव का दाह संस्कार करने के बाद राख को भारतीय महासागर में प्रवाहित कर दिया। सेना प्रमुख ने बताया कि प्रभाकरण के साथ करीब 170 तमिल टाइगर भी मारे गये। उन्होंने कहा कि लिट्टे के खुफिया प्रमुख पोट्टू अम्मन, प्रभाकरण की पत्नी माधिवाधानी और पुत्री के शव भी मिले हैं, लेकिन पुख्ता तौर पर उनके शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। हालांकि प्रभाकरण के बड़े बेटे चार्ल्स एंथोनी के शव की पहचान हो चुकी है।
क्या प्रभाकरण वाकई में जिंदा है
सेना द्वारा प्रभाकरण के मारे जाने की खबर का लिट्टे ने खंडन किया है। टीवी पर दिखाये गये शव को लिट्टे ने प्रभाकरण का शव मानने से इन्कार कर दिया है। लिट्टे समर्थक वेबसाइट तमिलनेट डाट काम पर प्रभाकरण की मौत की खबर को अफवाह बताया गया था और कहा गया था कि लिट्टे प्रमुख जीवित व सुरक्षित हैं।
लिट्टे की खुफिया शाखा के अंतरराष्ट्रीय सचिवालय के प्रमुख अरिवाजहाकन के हवाले से लिट्टे समर्थक वेबसाइट ने दोबारा खबर दी है कि उनका नेता जीवित और सही सलामत है। प्रभाकरण की मौत की अफवाह दुनिया भर में तमिल समुदाय को भ्रमित करने के उद्देश्य से फैलाई गई है, ताकि अलग तमिल ईलम के समर्थन में उठने वाली आवाज पूरी तरह दब जाए। खबर में यह भी कहा गया है कि विद्रोही नेता भविष्य में उचित समय देख कर अपने लोगों से संपर्क करेगा।


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