मून राहत शिविरों की हालत देखकर द्रवित

ये लोग तमिल विद्रोहियों पर श्रीलंका सेना के हमले से विस्थापित हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि वो शिविर में लोगों को स्थिति देखकर द्रवित हैं.
श्रीलंका सरकार राहत एजेंसियों को बेरोकटोक विस्थापित तमिल लोगों तक पहुंचने की अनुमति दे बान की मून, संयुक्त राष्ट्र महासचिव
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बान की मून के साथ गए बीबीसी संवाददाता ने कहा कि एक स्थान पर 74 हज़ार लोगों को रखा गया था जबकि इस शिविर में इसके आधे लोग ही आ सकते थे.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने श्रीलंका सरकार से अनुरोध किया है कि वह राहत एजेंसियों को बेरोकटोक विस्थापित तमिल लोगों तक पहुंचने की अनुमति दे.
उनका कहना था कि यदि लोग राहत शिविर छोड़कर जाना चाहें तो उन्हें इसकी भी अनुमति मिलनी चाहिए.
'गंभीर स्थिति'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कहना था, "समय आ गया है कि श्रीलंका इन लोगों के ज़ख़्मों पर मरहम लगाए."
बान की मून श्रीलंका दौरा करने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय अधिकारी हैं.
ग़ौरतलब है कि श्रीलंका सरकार ने इस हफ़्ते तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अपनी जीत और एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण की मौत की घोषणा की थी.
उल्लेखनीय है कि तमिल समुदाय के लगभग दो लाख 75 हज़ार लोग विभिन्न शिविरों में हैं और उन्हें मदद की ज़रूरत है लेकिन सेना उन इलाक़ों में जाने नहीं दे रही.
राहत एजेंसियों की शिकायत है कि शिविरों तक उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों को लगता है कि तमिलों को वास्तविक अधिकार देकर राजनीतिक हल के बगैर लड़ाई दोबारा शुरु हो सकती है.
कहा जा रहा है कि इस पूरे संघर्ष में करीब 80 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक जनवरी के बाद से ही करीब सात हज़ार नागरिक मारे गए हैं हालांकि श्रीलंका सरकार इस संख्या को ग़लत बताती है.


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