'विस्थापितों तक जाने की अनुमति हो'

श्रीलंका सरकार ने इस हफ़्ते घोषणा की है कि 26 साल से चल रहा तमिल विद्रोहियों का अभियान उसने ख़त्म कर दिया है और एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण की मौत हो गई है. इसके बाद श्रीलंका का दौरा करने वाले बान की मून पहले बड़े नेता हैं.
तमिल समुदाय के करीब दो लाख 75 हज़ार लोग विभिन्न शिविरों में हैं और उन्हें मदद की ज़रूरत है लेकिन सेना उन इलाक़ों में जाने नहीं दे रही.
बान की मून वावूनिया इलाक़े का दौरा करेंगे जहाँ सबसे ज़्यादा विस्थापित हैं.
राजनीतिक हल
मानवाधीकारों की रक्षा होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय और राहत एजेंसियों को शिविरों तक जाने दिया जाए बान की मून
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राहत एजेंसियों की शिकायत है कि शिविरों तक उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा.
कोलंबो पहुँचने के बाद बान की मून ने कहा," मानवाधीकारों की रक्षा होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय और राहत एजेंसियों को शिविरों तक जाने दिया जाए."
उन्होंने कहा कि वे श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से अपील करेंगे कि वो तमिल समुदाय की पुरानी शिकायतों और समस्याओं का निपटारा करें.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कहना था, "समय आ गया है कि श्रीलंका इन लोगों के ज़ख़्मों पर मरहम लगाए और धार्मिक-जातीय मतभेदों को छोड़कर एकजुट हों."
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को लगता है कि तमिलों को वास्तविक अधिकार देकर राजनीतिक हल के बगैर लड़ाई दोबारा शुरु हो सकती है.
कहा जा रहा है कि इस पूरे संघर्ष में करीब 80 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक जनवरी के बाद से ही करीब सात हज़ार नागरिक मारे गए हैं हालांकि सरकार इस आँकड़े को गलत बता रही है.
बान की मून के आने से पहले हुई एक रैली में महिंदा राजपक्षे ने इन बातों का खंडन किया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध न्यायालय में ले जाया जा सकता है.


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