भाजपा संसदीय बोर्ड की अहम बैठक

इस कड़ी में तलवार उनके सिर भी लटक रही है जिनके पास राज्यों की बागडोर थी या जहाँ पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, स्थितियाँ अनुकूल थीं फिर भी परिणाम निराशाजनक रहे.
समीक्षा के इसी क्रम में पार्टी की संसदीय बोर्ड की एक बैठक शनिवार को दिल्ली में हो रही है.
पर शनिवार की बैठक किसी सैद्धांतिक नतीजे के बजाय इस बात को लेकर भी अहम हो गई है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का भविष्य क्या होगा.
बीसी खंडूरी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं और राज्य में उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. लेकिन आम चुनाव में पार्टी को अपने ही गढ़ में करारी हार का सामना करना पड़ा.
पार्टी को राज्य में एक भी संसदीय सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी. इसे लेकर शीर्ष नेतृत्व से लेकर राज्य इकाई तक चिंता है और उंगलियाँ उठ रही हैं मुख्यमंत्री खंडूरी की ओर.
क्या जाएंगे खंडूरी
ऐसा नहीं है कि खंडूरी के लिए पहली बार राज्य की सत्ता के शीर्ष पर बैठने को लेकर पार्टी में असंतोष के स्वर सुनाई दिए हों.
इससे पहले भी कोश्यारी खंडूरी के प्रति अपने धड़े के साथ असंतोष व्यक्त कर चुके हैं पर बाद में पार्टी के इस आंतरिक मामले को सुलझा लिया गया.
पर इस बार मामला आम चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का है. खंडूरी इस मामले में किसी कठिन फैसले की भेंट चढ़ सकते हैं.
हालांकि खंडूरी इस कठिन दौर के लिए तैयारी कर चुके हैं और पार्टी को 34 में से 24 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपी जा चुकी है.
खंडूरी को उम्मीद है कि चिट्ठी उनके प्रति किसी कठिन फैसले से उनका बचाव करेगी पर पार्टी ने मुख्तार अब्बास नकवी और थवरचंद गहलोत को बतौर पर्यवेक्षक इस काम पर लगाया है. इन दोनों ने पार्टी के विधायकों से अलग अलग मुलाक़ात की है और अब अपनी रिपोर्ट संसदीय बोर्ड को सौंपने वाले हैं.


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