अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से पाक में अस्थिरता

पर इन कोशिशों से अलग तरह का संकट भी पैदा होता नज़र आ रहा है. अमरीकी सेना के वरिष्ठतम कमांडरों में से एक ने चिंता जताई है कि अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य अभियान के तेज़ी का असर पाकिस्तान पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य अभियान की तेज़ी के कारण बड़े पैमाने पर तालेबान लड़ाके पाकिस्तान की सीमा और उसके भीतर प्रवेश कर जाएंगे.
इससे सबसे बड़ी चिंता यह है कि इनकी पाकिस्तान में तादाद बढ़ने से पाकिस्तान को अस्थिरता का ख़तरा हो सकता है.
अमरीका की विदेश संबंधों की संसदीय समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए अमरीकी एडमिरल माइक मुलेन ने कहा इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि अफ़ग़ानिस्तान को दोबारा तालेबान के कब्ज़े में आने से बचाने की ज़रूरत है.
पर ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के प्रमुख माइक ने साथ ही एक अमरीकी सीनेटर के इस तर्क से भी सहमति जताई कि इस उद्देश्य की सफलता का बुरा असर पाकिस्तान में देखने को मिल सकता है.
पाकिस्तान को लेकर चिंता
हालांकि माइक ने अपने वक्तव्य में कहा कि पाकिस्तान और अमरीका की सेनाएं इस स्थिति से निपटने के लिए बड़े प्रयासों की तैयारी कर रही हैं.
मुलेन ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान का ख़ात्मा ज़रूरी है
दरअसल, अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी नेतृत्ववाली नैटो गठबंधन सेना का अभियान देश में तालेबानों को पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए पिछले कुछ वर्षों से लगातार जारी है.
पर यह काम अबतक पूरा नहीं हो सका है. सेना ने पिछले कुछ समय से अपने अभियान में तेज़ी दिखाई है पर इससे बड़ी तादाद में तालेबान लड़ाकों के अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने और पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाना खोजने की स्थिति बनी है.
तालेबान के पाकिस्तान में प्रवेश से अमरीका और पाकिस्तान, दोनों ही देश चिंतित रहे हैं. इसे रोकने के लिए पाकिस्तान की सेना की बड़ी तादाद में अफ़ग़ानिस्तान से लगे सीमा क्षेत्र में तैनाती भी की गई है.
पिछले कुछ समय के घटनाक्रम को देखें तो पाकिस्तान में तालेबान समर्थकों या तालेबान लड़ाकों का प्रभाव बढ़ा है और अस्थिरता का संकट पैदा हुआ है.
अमरीकी सेना का शीर्ष नेतृत्व भी इस चुनौती को मान रहा है और इसे नियंत्रित करने के प्रयासों किए जा रहे हैं.


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