बान की मून आज श्रीलंका दौरे पर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून शुक्रवार को श्रीलंका का दौरा कर रहे हैं. वे शिविरों में रहने वाले विस्थापितों से मिलने जा सकते हैं.
लेकिन सरकार और विद्रोहियों के बीच संघर्ष के दौरान हज़ारों की संख्या में तमिल समुदाय के लोग विस्थापित हो गए हैं. इसी सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्रीलंका आ रहे हैं.
इससे पहले गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ विजय नांबियार ने वावुनिया में शिविरों का दौरा किया. ये जानकारी संयुक्त राष्ट्र की उपप्रवक्ता मेरी ओकाबे ने दी.
एपी के अनुसार मेरी ओकाबे ने बताया है कि नांबियार ने तमिल यूनाइटेड लिबरेश्न फ़्रंट के अध्यक्ष से भी मुलाकात की. ये तमिलों की एक राजनीतिक पार्टी है.
मुलाक़ात के दौरान हताहत और गुमशुदा लोगों के बारे में बातचीत हुई और साथ ही शिविरों के लिए और ज़मीन दिए जाने का मुद्दा भी उठा. एएफ़पी के मुताबिक रेड क्रॉस अंतरराष्ट्रीय समिति ने वावुनिया में सबसे बड़े शर्णार्थी शिविर तक राहत सामग्री न पहुँचने देने के श्रीलंका सरकार के फ़ैसले की निंदा की है.
समस्या का हल
श्रीलंका सरकार ने प्रभाकरण के मौत की पुष्टि की है. गुरुवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिव शंकर मेनन भी श्रीलंका पहुँचे हुए थे. श्रीलंका सरकार ने कुछ दिन पहले इस बात की पुष्टि की थी कि एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरण की मौत हो गई है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात के बाद सरकार ने भारत को भरोसा दिलाया कि छह महीने के अंदर विस्थापित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था कर दी जाएगी.
भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने कहा कि वे यह समझते हैं कि श्रीलंका की सरकार भारत के साथ हुए समझौते को आधार बनाकर ही इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश करेगी जो सभी को मान्य होगा.
उधर श्रीलंका सरकार में मंत्री और पूर्व विद्रोही कर्नल करुणा ने कहा है कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में चुनाव करवाए जाएँगे. उन्होंने कहा है कि श्रीलंका में तमिल समुदाय की शिकायतें दूर करने में ये चुनाव मददगार रहेंगे. श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे कह चुके हैं कि तमिलों की सुरक्षा करना उनकी सरकार की ज़िम्मेदारी है.


Click it and Unblock the Notifications