संघर्ष में छह हज़ार सैनिक मारे गए

श्रीलंका की सरकार ने स्वीकार किया है कि अगस्त 2006 से एलटीटीई के साथ संघर्ष के दौरान छह हज़ार से ज़्यादा सैनिक मारे गए और 30 हज़ार घायल हुए. रक्षा सचिव गोटाबाया राजपक्षे ने सरकारी टेलीविज़न पर ये आँकड़े जारी किए हैं. माना जाता है कि पिछले 26 साल से चले संघर्ष में कम से कम 80 हज़ार लोग मारे गए हैं.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून शुक्रवार को कोलंबो पहुँच रहे हैं. वे दो लाख 75 हज़ार विस्थापित लोगों के पलायन के बारे में श्रीलंका सरकार से विचार-विमर्श करेंगे. श्रीलंका की सरकार ने इस सप्ताह एलटीटीई के साथ संघर्ष समाप्त होने की आधिकारिक रूप से घोषणा की.
श्रीलंका के सैनिकों ने इस सप्ताह एलटीटीई के क़ब्ज़े वाले आख़िरी क्षेत्र पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया.श्रीलंका सरकार के मुताबिक़ कार्रवाई के दौरान एलटीटीई के कई शीर्ष कमांडर भी मारे गए जिनमें एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण भी शामिल थे.
बयान
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई रक्षा सचिव गोटाबाया राजपक्षे ने सरकारी टेलीविज़न पर बताया कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ आख़िरी अभियान अगस्त 2006 में शुरू हुआ था. अगस्त 2006 में शुरु हुई थी निर्णायक लड़ाई. राजपक्षे ने बताया, "अगस्त 2006 से कार्रवाई के दौरान थल सेना, नौ सेना, वायु सेना, पुलिसबल के 6261 जवान मारे गए हैं और 29551 घायल हुए हैं. हमने इस जीत के लिए बहुत बड़ा बलिदान किया है."
संघर्ष के दौरान एलटीटीई के कितने सदस्य मारे गए, इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं है. लेकिन माना जाता है कि ये संख्या 15 हज़ार से 22 हज़ार तक हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस साल जनवरी से ही सात हज़ार आम नागरिक मारे गए हैं हालाँकि श्रीलंका की सरकार इससे इनकार करती है. श्रीलंका सरकार का कहना है कि एलटीटीई के साथ संघर्ष ख़त्म होने के बाद अब उसका ध्यान विस्थापित लोगों के पुनर्वास पर है.


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