सर्वोच्च न्यायालय ने मप्र उच्च न्यायलय को लगाई फटकार
न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति एम. के. शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला अस्वीकार्य,अवैध, पेचीदा और किसी भी सभ्य समाज के मूल्यों के खिलाफ है।"
इस खंडपीठ ने 15 अप्रैल को सुनाए अपने फैसले में कहा, " उच्च न्यायलय के निर्णय ने हमारे देश के पूरे संयुक्त परिवार के ढांचे को ध्वस्त करने और बेईमानी को फायदा पहुंचाने का काम किया है।"
दरअसल, इंदौर के कादवली खुर्द में रहने वाले दो भाइयों सुखराम सिंह और जगन्नाथ सिंह के बीच जायदाद का विवाद था। सुखराम अपनी युवावस्था में ही अपने मामा के यहां रहने लगा था। जब वह गांव लौटा तो उसे भाई जगन्नाथ ने हिस्सा देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उसने जायदाद की देखभाल की है और ऐसे में सुखराम का इस पर हक नहीं है।
निचली अदालतों ने दोनों भाइयों में जायदाद के समान बंटवारे का फैसला सुनाया था। परंतु मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने जगन्नाथ के पक्ष में निर्णय दिया था।
पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाई अपने भाई पर विश्वास नहीं कर सकता। ऐसे में समाज में शांति कैसे रहेगी। पीठ ने कहा कि मामले का दुखद पहलू यह है कि उच्च न्यायालय ने गलत व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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