पाकिस्तान को मिलेगी तिगुनी सहायता

हालाँकि इस मदद के लिए कड़ी शर्तें रखी गई हैं.
विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक अमरीकी राष्ट्रपति को ये बताना होगा कि मदद के बदले पाकिस्तान 'आतंकवादी' संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है, उसकी सेना या ख़ुफ़िया एजेंसियाँ किसी चरमपंथी संगठन को मदद नहीं दे रही हैं.
पाकिस्तान को ये भी दिखाना होगा कि उसने सूबा सरहद के कबायली इलाक़ों में चरमपंथी ठिकाने बंद करा दिए हैं और वह आतंकवाद विरोधी और हवाला क़ानूनों को मज़बूत बना रहा है.
अमरीकी संसद के कुछ सदस्यों ने क़ानून में इस तरह की कड़ी शर्तों पर चिंता जताई है.
सहायता
'पाकिस्तान सहायता और सहयोग क़ानून' के तहत अमरीका से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता तिगुनी हो जाएगी.
संसदीय समिति के चेयरमैन हम सभी पाकिस्तान के स्थायित्व और सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं. हम अल क़ायदा या किसी अन्य आतंकवादी समूह को पाकिस्तान में गतिविधियाँ चलाने की अनुमति नहीं दे सकते जिनसे अमरीका की सुरक्षा को ख़तरा है होवर्ड बर्मन
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इसके तहत वर्ष 2013 तक उसे हर साल डेढ़ अरब डॉलर की राशि दी जाएगी.
इसका उपयोग पाकिस्तान के राष्ट्रीय और प्रांतीय संस्थानों, शिक्षा और न्यायिक प्रणाली को मज़बूत बनाने में किया जाएगा.
तालेबान और अन्य चरमपंथी गुटों से लड़ रही पकिस्तानी सेना और विशेष बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी पैसे दिए जाएंगे.
अमरीकी संसद ने अलग से युद्ध कोष विधेयक के तहत 40 करोड़ डॉलर का राशि देने को मंज़ूरी दी है.
संसदीय समिति के चेयरमैन होवर्ड बर्मन ने कहा, "हम सभी पाकिस्तान के स्थायित्व और सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं. हम अल क़ायदा या किसी अन्य आतंकवादी समूह को पाकिस्तान में गतिविधियाँ चलाने की अनुमति नहीं दे सकते जिनसे अमरीका की सुरक्षा को ख़तरा है."


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