मंत्रालयों को लेकर यूपीए में खींचतान

इसी दबाव को देखते हुए गुरुवार सुबह कार्यवाहक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बीच होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई.
इस बैठक में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले लोगों के नामों की सूची सौंपने वाले थे.
मनमोहन सिंह शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं.
मंत्रालयों का बँटवारा
समाचार एजेंसियों के मुताबिक वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी मंत्रालयों के बँटवारे के मुद्दे पर यूपीए के सहयोगी दलों के साथ बातचीत कर रहे हैं.
इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि सरकार में किसी मंत्रालय के लिए वह दबाव नहीं डाल रही है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता पार्थो चटर्जी ने कहा, "मैं अपनी नेता (ममता बनर्जी) को अच्छी तरह जानता हूँ. उन्होंने पहले ही यह साफ़ कर दिया है कि वह किसी मंत्रालय के लिए बातचीत नहीं कर रही हैं."
मैं अपनी नेता को अच्छी तरह जानता हूँ. उन्होंने पहले ही यह साफ़ कर दिया है कि वह किसी मंत्रालय के लिए बातचीत नहीं कर रही हैं पार्थो चटर्जी, तृणमूल कांग्रेस नेता
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उनसे जब यह पूछा गया कि क्या ममता बनर्जी मंत्रिमंडल में शामिल होंगी तो उन्होंने कहा, " मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता क्योंक मैं पार्टी के संसदीय दल का सदस्य नहीं हूँ."
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग के सवाल का उन्होंने कोई सीधा जवाब तो नहीं दिया लेकिन कहा कि वाम मोर्चे की सरकार को ज़रूर जाना चाहिए क्योंकि जनादेश उनके ख़िलाफ़ है.
ख़बरों के मुताबिक यूपीए की महत्वपूर्ण घटक डीएमके पाँच कैबिनेट और चार राज्यमंत्री के पद की माँग कर रही है.
रेल पर खेल
डीएमके की नज़र स्वास्थ्य, दूरसंचार, बिजली, भूतल परिवहन और रेलवे जैसे मंत्रालयों पर है.
वहीं तृणमूल कांग्रेस की माँग है कि मंत्रिमंडल में उसके मंत्रियों की संख्या डीएमके से एक अधिक होनी चाहिए.
तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के बीच सबसे अधिक खींचतान रेल मंत्रालय को लेकर चल रही है.
रेल मंत्रालय पिछली बार राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव के पास था लेकिन इस बार उनकी पार्टी को केवल चार सीटें ही मिली हैं.
ऐसी ख़बरें हैं कि कांग्रेस ने सहयोगी दलों के लिए एक फ़ॉर्मूला तय कर लिया है. इसके मुताबिक हर सात सासंद पर एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद दिया जाएगा.


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