छह महीने के अंदर पुनर्वास का वादा

भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने गुरुवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाक़ात की.
एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण के मारे जाने के बाद भारत ने इन दो प्रतिनिधियों को कोलंबो भेजने का फ़ैसला किया था.
बातचीत के दौरान दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि ये समय तमिलों के पुनर्वास का है. साथ ही मसले का स्थायी हल निकालने की आवश्यकता है.
श्रीलंका की सरकार भारत के साथ हुए समझौते को आधार बनाकर ही इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश करेगी. जो सभी को मान्य होगा शिवशंकर मेनन
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श्रीलंका की सरकार ने स्वीकार किया कि वह 13वें संशोधन को लागू करने को प्रतिबद्ध है. इस संशोधन के मुताबिक़ प्रांतों को ज़्यादा अधिकार दिए जाने की बात है.
श्रीलंका के सरकार ने भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन को बताया है कि श्रीलंका सरकार ने तीन महीने की एक योजना तैयार कर ली है.
श्रीलंका सरकार विस्थापित तमिलों का पुनर्वास करेगी, जबकि भारत सरकार इसमें सहायता करेगी.
समाधान
बातचीत के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि व्यापक स्तर पर बातचीत की पहल की जाएगी ताकि जातीय संघर्ष का समाधान निकाला जा सके.
श्रीलंका में लाखों की संख्या में तमिल विस्थापित हुए हैं
कोलंबो में पत्रकारों से बातचीत में विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने कहा कि वे यह समझते हैं कि श्रीलंका की सरकार भारत के साथ हुए समझौते को आधार बनाकर ही इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश करेगी. जो सभी को मान्य होगा.
श्रीलंकाई सेना की कार्रवाई के दौरान भारी हथियारों के इस्तेमाल पर सवाल पूछे जाने पर विदेश सचिव ने कहा कि वे इस स्थिति में नहीं है कि इस मामले की पुष्टि करें या इनकार.
श्रीलंका के साथ सुरक्षा समझौते के बारे में दोनों प्रतिनिधियों का कहना था कि अभी प्राथमिकता राहत और पुनर्वास कार्य है.
दोनों प्रतिनिधियों ने बताया कि श्रीलंका सरकार एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण के मृत्यु प्रमाणपत्र की एक कॉपी उपलब्ध कराने का वादा किया है.


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