मलाईदार मंत्रालयों पर मोलभाव तेज

एक तरफ सभी प्रमुख मंत्रालय कांग्रेस अपने पास रखना चाहती है, जबकि सहयोगी दल अपनी सीटों का हवाला देते हुए प्रमुख मंत्रालयो की डिमांड कर रहे हैं। यही कारण है कि गुरुवार दोपहर तक मंत्रीलंडल की सूची तैयार नहीं हो पायी, जिस कारण प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच की मुलाकात टल गई।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक मंत्रालयों को लेकर कांग्रेस और कुछ दलों के बीच मतभेद शुरू होने लगे हैं। यदि सूची पूरी तरह तैयार नहीं हुई तो प्रधानमंत्री कुछ ही मंत्रियों के साथ कल शपथ लेंगे। बाद में कैबिनिट का विस्तार कर उसमें सहयोगियों को स्थान दिया जाएगा।
डीएमके, टीएमसी के दबाव में कांग्रेस
पार्टी सूत्रों के मुताबिक डीएमके और तृणमूल कांग्रेस के अलावा कुछ छोटे दलों के नेता भी कुछ खास मंत्रालयों के बारे में सुबह तक अड़े थे। कांग्रेस पर इस समय डीएमके का भारी दबाव है, जो 9 मंत्रालय मांग रहा है, जबकि ममता बनर्जी अपनी तृणमूल कांग्रेस के लिए डीएमके से एक मंत्रालय ज्यादा मांग रही हैं। इस समय संसद में डीएमके के 18 सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के 19 सदस्य हैं।
संप्रग के सहयोगी दलों को 7 सांसदों पर एक कैबिनेट मंत्री का फॉर्मूला रास नहीं आ रहा है। खबर है कि कांग्रेस ने डीएमके को दो कैबिनेट, एक राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार औऱ तीन राज्य मंत्री का प्रस्ताव दिया है। हालांकि इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लग सकी है।
शपथ ग्रहण कल शाम 5:30 बजे
कांग्रेस के घटक दलों के बीच मंत्रालयों को लेकर चल रही उठापटक के बाद राष्ट्रपति से वार्ता स्थगित होने पर मीडिया के एक वर्ग ने यह खबर प्रसारित की है कि कल होने वाला शपथ ग्रहण टल सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला। राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक शुक्रवार शाम 5:30 बजे ही होगा ।


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