नर्मदा नदी पर बना बांध खतरे में
भोपाल, 21 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निवासियों का गला तर करने के लिए नर्मदा नदी से पानी लाने वाली नर्मदा जल परियोजना के काम की धीमी रफ्तार ने काफर बांध (अस्थाई बांध) को खतरे में डाल दिया है। सीहोर जिले के हिरानी में बन रहे इंटेकवेल का काम बरसात से पहले पूरा नहीं हुआ तो अस्थाई बांध टूट जाएगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुधवार को इंटेकवेल कार्य स्थल का निरीक्षण करने के वक्त जो रिपोर्ट सौंपी गई है वह चौंका देने वाली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस कंपनी के पास ठेका है उसके द्वारा निर्माण कार्यो में अकुशल कारीगरों का न केवल लगाया गया है बल्कि सिर्फ एक पाली में ही काम चल रहा है। इस स्थिति में इंटेकवेल के लिए चल रहे कार्यो का बरसात के पहले पूरा होना संभव नहीं लगता।
विभाग के प्रमुख अभियंता सुधीर सक्सेना और मुख्य अभियंता क़े क़े पयासी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि आज जरूरत इस बात की है कि मजदूरों से तीन पाली में काम कराया जाए। परंतु ऐसा हो नहीं रहा है। इसके चलते बरसात से पहले इंटेकवेल के काम का पूरा होना मुश्किल लगता है। बरसात के पहले काम पूरा न होने की स्थिति में हिरानी के करीब निर्माण व खुदाई कार्य में बाधक बनने वाले नर्मदा नदी के पानी को रोकने के लिए बनाए गए काफर बांध (अस्थाई बांध) के टूटने का खतरा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर काफर बांध टूट जाता है तो यह कार्य नवंबर-दिसंबर से पहले पूरा नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि नर्मदा नदी में पानी का बहाव वर्षा के कारण बढ़ जाएगा।
चौहान सितंबर के अंत तक राजधानी वासियों को नर्मदा का पानी दिलाने की बात कह रहे है मगर विशेषज्ञों की यह रिपोर्ट उनकी मंशा पर हो रहे कुठाराघात का खुलासा करने वाली हैं। चौहान ने कार्य स्थल निरीक्षण के दौरान निर्माण कंपनी को आड़े हाथों लिया और काम की प्रगति पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि निर्माण कंपनी को इंटेकवेल निर्माण का काम वर्षा के पहले पूरा कर लेना चाहिए और इसके लिए वह दो पाली में काम कराने के साथ कुशल कारीगरों की मदद लें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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