पिता के सच्चे उत्तराधिकारी हैं 'पप्पू'
परंतु आज वह न सिर्फ लगातार तीसरी बार उड़ीसा के मुख्यमंत्री बने हैं बल्कि अपने स्वर्गीय पिता बीजू पटनायक की विरासत के सच्चे और वाजिब उत्तराधिकारी भी साबित हुए हैं।
यह अविवाहित राजनेता यानी नवीन पटनायक अपने मित्रवत और सादे स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। राज्य की लाखों जनता के दिल में जगह बनाने वाले पटनायक आज के समय में देश के सबसे आकर्षक व्यक्तित्व वाले नेताओं में शुमार किए जाते हैं। अपने दोस्तों के बीच में वह पप्पू के नाम से जाने जाते हैं।
इस बार के विधानसभा चुनाव में पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) को कुल 147 सीटों में से 103 पर जीत हासिल हुई। राज्य में लोकसभा की कुल 21 सीटों में से भी 14 पर बीजद ने कब्जा जमाया। उड़ीसा में उनकी यह भारी जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ लिया था।
कटक में 16 अक्टूबर, 1946 में पैदा हुए पटनायक का सियासी सफर भले ही शानदार कामयाबियों से भरा हो लेकिन यह इतना आसान भी नहीं था। वर्ष 1997 में वह अपने पिता की परंपरागत सीट अस्का से जनता दल के टिकट पर चुनकर लोकसभा पहुंचे।
इसके एक साल बाद ही उन्होंने बीजद का गठन किया। साल 1998 में उनकी पार्टी भाजपा के साथ गठजोड़ कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन (राजग) में शामिल हो गई।
वर्ष 1999 में वह केंद्र में मंत्री बने। इसके एक साल बाद ही वह भाजपा के सहयोग से उड़ीसा के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2004 में वह फिर राज्य के मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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