अंतरराष्ट्रीय समुदाय श्रीलंका पर चिंतित

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्रीलंका की स्थिति पर चर्चा के लिए कोलंबो रवाना हो रहे हैं. इधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी तमिलों की स्थिति पर चिंता जताई है. इसके पहले उन्होंने डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि से मुलाक़ात कर इस विषय में चर्चा की.
'हमारी जानकारी के अनुसार प्रभाकरण अब नहीं रहे लेकिन हम उनकी मौत के बारे में और जानकारी लेंगे एमके नारायणन, भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
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मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बातचीत में एमके नारायणन ने कहा, "हमारी जानकारी के अनुसार प्रभाकरण अब नहीं रहे लेकिन हम उनकी मौत के बारे में और जानकारी लेंगे."
भारत ने कहा है कि प्रभाकरण के मारे जाने के साथ ही श्रीलंका में लड़ाई ख़त्म हो गई है और अब वहाँ की सरकार को तमिलों की समस्याएँ हल करनी चाहिए. भारत ने जल्दी ही श्रीलंका के युद्ध प्रभावित इलाक़े में चिकित्सा दल और दवाइयाँ भेजने का फ़ैसला किया है.
बान की मून का दौरा
दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने घोषणा की है कि जल्द ही वो श्रीलंका का दौरा करेंगे. प्रभाकरण के मारे जाने की ख़बर के बाद कोलंबों की सड़कों पर जश्न मनाया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि वे सैन्य अभियान के ख़त्म होने से तो राहत महसूस कर रहे हैं लेकिन वे आम नागरिकों के मारे जाने पर बहुत चिंतित हैं.
उनका कहना था, "आम लोगों को मदद, पुनर्निर्माण और राजनीतिक संवाद की दिशा में तेज़ी से प्रगति होनी चाहिए. तीनों क्षेत्रों में काम अभी शुरु होना चाहिए और साथ-साथ चलना चाहिए. " बान की मून ने कहा, "हमें जल्द से जल्द युद्ध के घाव भरने चाहिए जिसके कारण 30 वर्षों से समुदाय अलग-थलग पड़ गए हैं. तमिल समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों की जायज़ चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान खोजा जाना चाहिए."
उनका कहना था, "जहाँ-जहाँ अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन के गंभीर और वाजिब आरोप सामने आते हैं, उनकी उचित जाँच होनी चाहिए." अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अनेक राहत संस्थाओं ने भी श्रीलंका की सरकार से अनुरोध किया है वह तेज़ी से राहत पहुँचाए और समुदायों में मैत्री के प्रयास तेज़ करे.
मानवीय त्रासदी
उधर संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद ने कहा है कि वह 25 मई को विशेष सत्र बुलाकर श्रीलंका में मानवाधिकार स्थिति पर चर्चा करेगी. ये सत्र 17 सदस्य देशों के अनुरोध पर बुलाया गया है. आम लोगों को मदद, पुनर्निर्माण और राजनीतिक संवाद की दिशा में तेज़ी से प्रगति होनी चाहिए. तीनों क्षेत्रों में काम अभी शुरु होना चाहिए और साथ-साथ चलना चाहिए बान की मून, संयुक्त राष्ट्र महासचिव
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इसके पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल लोगों को आश्वासन दिया था कि सभी लोगों की रक्षा की जाएगी और सभी को समान अधिकार हासिल होंगे और लोग बिना किसी भय के रह सकेंगे.
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को श्रीलंका सेना ने पुष्टि की थी कि तमिल विद्रोही नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरण का शव बरामद कर लिया गया है और उनकी पहचान सुनिश्चित कर ली गई है.श्रीलंका के सरकारी टीवी पर उनकी तस्वीरें दिखाई गईं जिनमें चेहरा स्पष्ट नज़र आ रहा था.


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