'तमिल विद्रोही नेता प्रभाकरण का शव बरामद'

सेना के एक वरिष्ठ कमांडर ब्रिगेडियर शवेंद्र सिल्वा ने बीबीसी को बताया कि प्रभाकरण का शव संघर्ष वाले क्षेत्र से उनके कई अन्य सहयोगियों के साथ बरामद किया गया.
प्रभाकरण का जीवन
श्रीलंका के सरकारी टीवी पर उनकी तस्वीरें दिखाई गईं जिनमें चेहरा स्पष्ट नज़र आ रहा था.
श्रीलंका सेना का कहना है कि जब संघर्षवाले क्षेत्र से प्रभाकरण एक एंबुलेंस में भागने की कोशिश कर रहे थे, उस दौरान वो मारे गए.
इसके पहले उनके मारे जाने को लेकर भ्रम उत्पन्न हो गया था क्योंकि विद्रोहियों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख ने तमिल विद्रोहियों से सहानुभूति रखनेवाली वेबसाइट में कहा था कि प्रभाकरण जीवित और सुरक्षित हैं.
इसके पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने संसद को संबोधन में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ जीत का ऐलान किया. लेकिन उन्होंने तमिल विद्रोही नेता प्रभाकरण की मौत के बारे में कुछ नहीं कहा था.
श्रीलंका को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम के आतंकवाद से मुक्त करा लिया गया है महिंदा राजपक्षे, श्रीलंका के राष्ट्रपति
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राष्ट्रपति राजपक्षे ने अपने संबोधन में कहा,''श्रीलंका को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) के आतंकवाद से मुक्त करा लिया गया है.''
उन्होंने कहा कि ये संघर्ष एलटीटीई के ख़िलाफ़ था न कि तमिल लोगों के.
उन्होंने तमिल लोगों को आश्वासन दिया कि सभी लोगों रक्षा की जाएगी और सभी को समान अधिकार हासिल होंगे और लोग बिना किसी भय के रह सकेंगे.
उनके इस संबोधन को श्रीलंका में टीवी पर लाइव दिखाया गया.
महिंदा राजपक्षे ने कहा कि इसके पहले श्रीलंका के एक तिहाई हिस्से पर श्रीलंकाई पार्लियामेंट के क़ानून नहीं चलते थे लेकिन अब देश के सभी हिस्सों पर ये क़ानून लागू होंगे.
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तमिल विद्रोहियों को फिर से पैर जमाने नहीं दिया जाएगा.
भारत की प्रतिक्रिया
इधर अमरीकी सरकार ने कहा है कि श्रीलंका सरकार को तमिल और अन्य गुटों के साथ बातचीत कर ऐसी राजनीतिक व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें सभी नागरिकों के हितों की रक्षा की जा सके.
श्रीलंकाई अधिकारियों का दावा है कि प्रभाकरण खुफिया विभाग के प्रमुख और नौसेना प्रमुख के साथ मारे गए
भारत ने भी कहा है कि प्रभाकरण के मारे जाने के साथ ही श्रीलंका में लड़ाई ख़त्म हो गई है और अब वहां की सरकार को तमिलों की समस्याएँ हल करनी चाहिए.
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा,''अब श्रीलंका में लड़ाई ख़त्म हो गई है, इसलिए वहां की सरकार को संविधान में सत्ता के विकेंद्रीकरण पर ध्यान देना चाहिए ताकि तमिलों समेत सभी समुदाय अपने को सुरक्षित महसूस कर सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें.''
भारत ने जल्दी ही श्रीलंका के युद्ध प्रभावित इलाक़े में चिकित्सा दल और दवाइयाँ भेजने का फ़ैसला किया है.
इस ख़बर के आने के बाद श्रीलंका के कई हिस्सों में लोगों के जश्न मनाने की ख़बरें हैं.
कोलंबो में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सेना प्रमुख जनरल फोनसेंका की ''सैन्य अभियान ख़त्म होने'' की घोषणा के बाद लोगों ने सड़कों पर आकर जश्न मनाया.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि 40 से 60 हज़ार तमिल लोग राहत शिविरों का रुख़ कर रहे हैं जबकि शिविरों में पहले से ही बहुत भीड़ है.
अब श्रीलंका में लड़ाई ख़त्म हो गई है, इसलिए वहां की सरकार को संविधान में सत्ता के विकेंद्रीकरण पर ध्यान देना चाहिए ताकि तमिलों समेत सभी समुदाय अपने को सुरक्षित महसूस कर सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
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संयुक्त राष्ट्र आपात राहत के समन्वयक जॉन होम्स ने कहा कि पहले से ही लगभग सवा दो लाख लोग राहत शिविरों में हैं और वे मानवीय त्रासदी से जूझ रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सैन्य प्रतिनिधि विजय नांबियार श्रीलंका पहुँच गए हैं और वे सरकारी अधिकारियों से मुलाक़ात कर रहे हैं. वो मंगलवार को एक शिविर की स्थिति देखने भी जाएंगे.
श्रीलंका पर नियंत्रण
पिछले कुछ हफ्तों में श्रीलंका की सेना ने विद्रोहियों को उनके लगभग सभी इलाक़ों से खदेड़ दिया है.
सोमवार को जनरल फोनसेका ने कहा, ''हमें राष्ट्रपति ने जो काम दिया था, वो हमने पूरा कर दिया है और देश को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के चंगुल से निकाल लिया है. ''
सेना ने प्रभाकरण के बेटे चार्ल्स एंथनी के मारे जाने का भी दावा किया है
सैन्य अधिकारियों का कहना है कि प्रभाकरण अपने खुफिया विभाग के प्रमुख पोट्टू अमान और नौसेना के प्रमुख सुसै के साथ मारे गए हैं.
सेना के प्रवक्ता ने एक प्रसारण में कहा कि 26 वर्षों के बाद श्रीलंका की पूरी ज़मीन एक बार फिर सेना के नियंत्रण में है.
इससे पहले प्रभाकरण के बेटे चार्ल्स एंथनी के अलावा एलटीटीई के तीन अन्य प्रमुख नेता भी मारे गए थे.


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