फिर दलितों का मुद्दा उठायेंगी माया

ज्ञात हो कि मायावती सिर्फ दलितों के उत्थान को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ी तो उत्तर प्रदेश की सत्ता हांसिल करने में विफल रहीं। यही कारण है कि प्रदेश विधान सभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने अपनी पार्टी में सवर्णों की तरफ रुख किया और भारी बहुमत के साथ सत्ता में आयीं। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर उन्हें अपने पुराने लक्ष्य की ओर मोड़ दिया है।
लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में मंगलवार को बसपा के अखिल भारतीय अधिवेशन में मायावती ने कहा कि पार्टी को अपनी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय सोच को बरकरार रखते हुए अपने पुराने दलित एजेंडे पर लौटना चाहिए। करीब चार घंटे के अपने भाषण की शुरूआत और समाप्ति मायावती ने दलित एजेंडे से ही की।
पार्टी के प्रदर्शन पर मंथन
बसपा के इस अखिल भारतीय अधिवेशन में देशभर से आए करीब 1000 कार्यकर्ताओं के अलावा प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक, चुने गए नए सांसदों सहित लोकसभा चुनाव में हारने वाले सभी प्रत्याशी मौजूद थे।
पार्टी के एक नेता ने बताया कि मायावती का लंबा भाषण यही कह रहा था कि पार्टी को अपनी सोशल इंजीनियरिंग पर एक बार फिर विचार करने की जरूरत है। सिर्फ दलित ही नहीं बल्कि सवर्णों के बारे में भी सोचना जरूरी है। बंद हॉल में हुई इस मीटिंग में पार्टी की विभिन्न कमेटियों के पुनर्गठन पर भी चर्चा हुई।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक मायावती ने अपनी पार्टी में मुस्लिम कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की कमी को नकारात्मक बताया।


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