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दूसरे कार्यकाल के लिए मनमोहन सिंह शुक्रवार को लेंगे शपथ (राउंडअप)

संप्रग नेतृत्व ने बुधवार शाम 322 सांसदों के समर्थन पत्र के साथ पाटिल से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसमें समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और बहुजन समाज पाटी (बसपा) के समर्थन पत्र भी शामिल हैं।

संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को एक पत्र सौंपा जिसमें सरकार के नेतृत्व के लिए संसदीय दल के नेता के रूप में मनमोहन सिंह का चुनाव किए जाने की बात कही गई है।

राष्ट्रपति के साथ करीब 10 मिनट की छोटी सी मुलाकात के बाद सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने मीडिया को संबोधित किया।

22 मई को शपथ ग्रहण समारोह के आयोजन का खुलासा करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "मैंने नई सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष दावा पेश किया है।"

उन्होंने कहा, "हमारे पास कांग्रेस और चुनाव पूर्व के गठबंधन के 274 सांसद हैं जिसमें चार निर्दलीय भी शामिल हैं। हमें सपा, बसपा, राजद और अन्य दलों के 48 सांसदों ने भी समर्थन दिया है। इस तरह हमारी संख्या 322 है।"

कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुने जाने पर पाटिल की ओर से दिए गए बधाई पत्र को भी मनमोहन सिंह ने पढ़कर सुनाया।

पाटिल ने मनमोहन सिंह से कहा, "नवनिर्वाचित 15वीं लोकसभा में बहुमत के पत्र को देखकर मुझे आपको प्रधानमंत्री नियुक्त करते हुए खुशी हो रही है। कृपया आप मुझे मंत्रिपरिषद के सदस्यों को नियुक्त करने के लिए सलाह दें।"

इससे पहले संप्रग के सहयोगियों ने एक बैठक में सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे पर चर्चा के साथ ही सोनिया गांधी को एक बार फिर अपना अध्यक्ष चुन लिया।

सोनिया के आवास 10 जनपथ पर हुई बैठक में मनमोहन सिंह सहित तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख एम. करुणानिधि, दयानिधि मारन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल तथा नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता फारुक अब्दुल्ला ने हिस्सा लिया। लोकसभा चुनावों में संप्रग ने 263 सीटें हासिल की हैं। सोनिया और मनमोहन के अलावा कांग्रेस की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी, पी. चिदंबरम, ए. के. एंटनी और राहुल गांधी शामिल हुए।

बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने संप्रग के अध्यक्ष पद के लिए सोनिया के नाम का प्रस्ताव रखा और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने इसका समर्थन किया।

बैठक के बाद बनर्जी ने कहा, "सर्वसम्मति से यह फैसला हुआ कि सोनिया और मनमोहन सिंह एक साथ राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे।" 19 सांसदों के साथ तृणमूल कांग्रेस संप्रग की सबसे बड़ी घटक है।

उन्होंने कहा, "हमने राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। मैंने कहा कि एक न्यूनतम साझा एजेंडा होना चाहिए और एक ऐसी समिति बननी चाहिए जो सभी दलों की बातों को सुन सके।"

संप्रग की बैठक के बाद कांग्रेस ने कहा कि घटक दलों ने कोई शर्त नहीं रखी है।

कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा, "संप्रग के घटकों ने कोई शर्त नहीं रखी। बैठक में मंत्री पद को लेकर कोई चर्चा हुई ही नहीं। संप्रग की बैठक में मतभेद का कोई सवाल ही नहीं है। प्रधानमंत्री के पास मंत्रिपरिषद के गठन का विशेषाधिकारहै।"

नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, "हमने बिना शर्त समर्थन दिया है। नेकां संप्रग की सहयोगी है और वही बने रहने की इच्छुक है।"

पार्टी की ओर से मंत्री पद की मांग किए जाने संबंधी रपटों को खारिज करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थो वाले लोगों ने नेकां की छवि खराब करने की कोशिश की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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