राजपक्षे से मुलाकात करेंगे नारायणन और मेनन (लीड-1)
नारायणन और मेनन की कोलंबो यात्रा राजपक्षे सरकार की लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) पर जीत की औपचारिक घोषणा के एक दिन बाद हो रही है। मंगलवार को ही श्रीलंका सरकार ने प्रभाकरन के शव की तस्वीरें जारी की थीं।
संवाददाताओं द्वारा प्रभाकरन की मौत के बारे में पूछे जाने पर नारायणन ने कहा, "जहां तक हम जानते हैं कि प्रभाकरन जीवित नहीं है लेकिन हम और ज्यादा पुष्टि करेंगे।"
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ टेलीफोन पर बातचीत में राजपक्षे ने इस बात की पुष्टि की थी कि लिट्टे का खात्मा हो गया है और प्रभाकरन मारा गया है।
श्रीलंका रवाना होने से पहले नारायणन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि से मुलाकात कर उनकी सलाह ली।
दिल्ली में करुणानिधि के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में नारायणन ने कहा, "मैं श्रीलंका जा रहा हूं इसलिए मैं उनकी राय लेने आया था।"
उन्होंने कहा, "तमिलों के हितों का उचित ध्यान रखा जाएगा।"
श्रीलंका में तमिलों की तकलीफें तमिलनाडु के लिए भावनात्मक मसला है इसलिए भारत की तत्काल प्राथमिकता बेघर हुए तमिलों के पुनर्वास के लिए कारगर कदम उठाया जाना सुनिश्चित करना और पुनर्निर्माण कार्यो में मदद करना है।
नारायणन और मेनन राजपक्षे से मुलाकात के दौरान इस बारे में कुछ आश्वासन भी चाहेंगे कि श्रीलंका सरकार सत्ता में भागीदारी के जरिए तमिलों को राजनीति की मुख्य धारा में लाने के कार्य को कैसे अंजाम देती है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा था, "हमारी नजर में श्रीलंका में परंपरागत संघर्ष समाप्त हो चुका है, ऐसे में अब वक्त आ गया है जब श्रीलंका के संघर्ष की जड़ को मिटाया जाए।"
श्रीलंका में पहले से मौजूद चिकित्सा दलों
के अलावा भारत की वहां 5000 तंबू भेजने की योजना है जिनमें करीब 25,000 लोग रह सकेंगे।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत की वहां बारूदी सुरंगे साफ करने वाले दल भेजने की भी योजना है ताकि नागरिकों को और नुकसान नहीं पहुंचे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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