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अमेरिकी कूटनीति में भारत को खास तवज्जो नहीं

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वाशिंगटन, 20 मई (आईएएनएस)। एक ओर जहां अमेरिका पाकिस्तान और अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के लिए कड़े प्रयास कर रहा है वहीं विदेश मंत्री हिलेरी क्िंलटन की नीति में भारत को खास तवज्जो नहीं दी जा रही है।

मंगलवार को दुनिया भर के संवाददाताओं से चर्चा के दौरान ओबामा प्रशासन की विदेश नीति संबंधी नई पहलों की चर्चा करते हुए उन्होंने भारत का कोई जिक्र नहीं किया जबकि इस बीच उन्होंने 17 दफे पाकिस्तान की चर्चा की।

क्लिंटन ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने में लगा हुआ है। उन्होंने चीन और रूस का जिक्र तो किया लेकिन भारत का नहीं। पूर्ववर्ती बुश प्रशासन हर मौके पर भारत के साथ रणनीतिक साझीदारी विकसित करने पर जोर देता था।

क्लिंटन ने कहा, "विदेश मंत्रालय आज के अंर्तसबंधित विश्व में साझेदारी, व्यावहारिकता और सिद्धांत पर आधारित एक नई कूटनीति विकसित करने को लेकर प्रतिबद्ध है।"

क्लिंटन ने कहा, "हम लैटिन अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया में अपने प्रमुख सहयोगियों और साझेदारों के साथ-साथ क्षेत्रीय ताकतों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहे हैं। "

उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन और रूस के साथ ज्यादा रचनात्मक और पूर्वाग्रह मुक्त संबंध बनाने में जुटा है।

संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत ही पाकिस्तान को सहायता की बात के साथ करके उन्होंने ओबामा प्रशासन की प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, बेहतर खाद्यान्न उत्पादन और तकनीक आदि मुद्दे उनकी और राष्ट्रपति ओबामा की प्राथमिकता हैं।

क्लिंटन ने कहा कि उनका देश अपने कूटनीतिक विस्तार के लिए नए तरीके अपना कर नए नए साझेदारों को अपने साथ जोड़ना चाहता है क्योंकि वह यह अच्छी तरह समझता है कि 21वीं सदी की दुनिया सिर्फ सरकार से सरकार के संबंधों से नहीं चल सकती। इसके लिए सरकार से जनता और जनता से जनता तक के संबंध बनाने होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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