राष्ट्रपति ने 14वीं लोकसभा भंग की

राष्ट्रपति ने 14वीं लोकसभा भंग की

इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसकी सिफ़ारिश की गई थी.

लोकसभा के नेता और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने ये प्रस्ताव पेश किया जिसका मनमोहन सिंह ने समर्थन किया.

इसके बाद पूरे मंत्रिपरिषद की बैठक हुई जिसमें आरजेडी नेता और रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव और लोक जनशाक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान भी मौजूद थे.

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में लालू ने कहा कि उन्होंने बिना शर्त सरकार को समर्थन देने की पेशकश की है.

दूसरी ओर पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि लालूजी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है.

रविवार की राजनीतिक सरगर्मी

इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिले और उन्हें ये प्रस्ताव सौंपा.

राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता का कहना था कि राष्ट्रपति ने मनमोहन सिंह को नई सरकार के गठन तक अपने पद पर बने रहने को कहा.

मंगलवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक के बाद हम उन दलों के साथ बैठक करेंगे जो चुनाव में हमारे साथ थे. इसी में तय होगा कि नई सरकार में किसे शामिल किया जाए जनार्दन द्विवेदी, कांग्रेस प्रवक्ता

मंगलवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक के बाद हम उन दलों के साथ बैठक करेंगे जो चुनाव में हमारे साथ थे. इसी में तय होगा कि नई सरकार में किसे शामिल किया जाए

सोमवार शाम को ही चुनाव आयोग नवनिर्वाचित 543 उम्मीदवारों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेगा.

नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची मिलने के बाद राष्ट्रपति पंद्रहवीं लोकसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी करेंगी और उसके बाद नई सरकार का गठन होगा.

इसके पहले रविवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी जिसमें चुनाव नतीजों की समीक्षा की गई.

संसदीय दल की बैठक

कांग्रेस कार्यसमिति के बाद पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी बताया कि मंगलवार को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक होगी जिसमें संसदीय दल के नेता का चुनाव किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि ये तकनीकी प्रक्रिया है और नेता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ही होंगे.

क्या कहते हैं प्रमुख चेहरे

उनका कहना था, "मंगलवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक के बाद हम उन दलों के साथ बैठक करेंगे जो चुनाव में हमारे साथ थे. इसी में तय होगा कि नई सरकार में किसे शामिल किया जाए."

बार-बार ये पूछने पर कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (राजद) या लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) सरकार में शामिल होगी, उनका जवाब था, "हमने कह दिया कि हम चुनाव पूर्व गठबंधन में शामिल दलों के साथ बैठ कर ही ये तय करेंगे और प्रीपोल एलायंस का क्या मतलब है, ये आप जानते हैं."

राज्यवार चुनावी नतीजे

ग़ौरतलब है कि राजद, लोजपा और समाजवादी पार्टी का कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर सहमति नहीं होने के कारण चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हो सका था.

सहयोगियों की तलाश

हालांकि चौथे मोर्चे के नाम से इन दलों के नेताओं ने बार-बार कहा कि वो चुनाव बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के साथ होंगे.

इसके पहले रविवार को समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की.

उल्लेखनीय है कि 2004 में मनमोहन सिंह ने 22 मई को शपथ ली थी.

15वीं लोकसभा चुनावी मुक़ाबले में यूपीए ने मुख्य विरोधी राष्ट्रीय जनतांत्रिक संगठन (एनडीए) को सत्ता की दौड़ में उसे परास्त कर दिया.

साथ ही उसने वाममोर्चा और तीसरे मोर्चे को जनता ने पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया.

शनिवार को देर रात तक आए परिणामों के अनुसार कांग्रेस को अकेले 205 सीटें मिली हैं जबकि उसके सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस को 19, द्रमुक को 18 और एनसीपी को 9 सीटें मिली हैं.

इसके अलावा कुछ और छोटे सहयोगी दलों की सीटें मिलाकर कांग्रेस गठबंधन को कुल 261 सीटें मिली हैं.

इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस को बहुमत के लिए मात्र 11 सीटों की ज़रुरत है.

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी को 116 सीटें मिली हैं जबकि उसके सहयोगी दल जनता दल यू को 20,शिवसेना को 11, शिरोमणि अकाली दल को चार, राष्ट्रीय लोकदल को चार और असम गणपरिषद को एक सीट मिली है.

भारतीय जनता पार्टी ने परिणामों के आने के बाद हार स्वीकार कर ली है.

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