भारतीय नौसेना में शामिल होगा ऐरावत

नौसेना के प्रवक्ता कमांडर नीरद सिन्हा ने कहा कि ऐरावत से जल और थल पर नौसेना की लड़ाकू क्षमता में वृद्धि होगी। एलटीएस का उपयोग समुद्र तटों पर सैनिकों और हथियारों को उतारने के लिए किया जाता है। इस जहाज से सी-किंग 42 सी और स्वदेशी ध्रुव दोनों प्रकार के हेलीकाप्टरों का संचालन किया जा सकता है। इस पर दो डब्ल्यूएम 18ए राकेट लांचर भी लगाए गए हैं।
नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता, एवीएसएम, पीवीएसएम, एडीसी दो दिन के दौरे पर पूर्वी नौसेना कमांड विशाखापट्नम पहुंचे। वे यहां नौसेना बेस, विशाखापट्नम में आई एन जेट्टी में 19 मई को होने वाले नौसेना के छठें लैंडिग शिप टैंक (लार्ज) ऐरावत के नौसेना में शामिल होने के समारोह के मुख्य अतिथि होंगे ।
ऐरावत, भारतीय नौसेना का पांचवां एलएसटी (एल) और शार्दूल श्रेणी का तीसरा जलयान है । शत्रु के खिलाफ जल-थल आपरेशनों के लिए डिजाइन किये गये प्लेटफार्म के साथ इसे शस्त्र कक्ष, सेंसर्स और देशज रूप में मगर श्रेणी (प्रथम एल एस टी (एल)) में उन्नत किया गया है।
जलयान में रिमोट प्रॉपल्सन कन्ट्रोल, बैटल डैमेज कन्ट्रोल सिस्टम और आटोमेटेड पॉवर मैनेजमेंट सिस्टम फिट किया गया है। जलयान को प्राकृतिक आपदाओं जैसे-सुनामी, चक्रवात, भूकम्प आदि के दौरान एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियान के कार्यो में प्रभावी तरीके से लगाया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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