आम नागरिकों की स्थिति पर गंभीर चिंता

श्रीलंका में विद्रोहियों ने संघर्षविराम की घोषणा की लेकिन इसके बाद भी संघर्ष जारी है. आम नागरिकों की स्थिति पर चिंता जताई जा रही है. श्रीलंका की सरकार का कहना है कि सैनिक आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं.
हालांकि इससे कुछ ही घंटों पहले विद्रोहियों ( एलटीटीई लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) से जुड़ी एक वेबसाइट ने कहा था कि विद्रोही हथियार डाल रहे हैं.
यूरोपीय संघ के मंत्रि जल्दी ही आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्टों की स्वतंत्र जांच की मांग कर सकते हैं. विद्रोहियों और श्रीलंका की सरकार दोनों ही एक दूसरे पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाती रही है.
सेना का कहना है कि अब तमिल विद्रोहियों को मात्र डेढ़ वर्ग किलोमीटर के दायरे में समेट दिया गया है और उनका सफाया कर दिया जाएगा.
रविवार को विद्रोहियों के अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रमुख सेलवरासा पथमंथन ने वेबसाइट तमिलनेट पर एक बयान जारी कर कहा था, '' यह लड़ाई अपने कड़वे अंत के निकट पहुंच गई है. ""
बाद में एक और बयान जारी कर विद्रोहियों के बदले रुख की जानकारी दी गई. इसमें कहा गया कि '' अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है तो विद्रोही आम तमिल लोगों की जान और सम्मान की रक्षा के लिए हथियार डालने के लिए तैयार हैं.""
राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे पहले ही जीत का दावा कर चुके हैं और शनिवार को ही उन्होंने कहा था कि श्रीलंका को बर्बरतापूर्ण कार्रवाईयों से मुक्ति मिल गई है.
उधर सोमवार को यूरोपीय संघ के मंत्रियों की बैठक हो रही है जिससे पहले एक बयान का मसौदा तैयार किया गया है जिसमें श्रीलंका में आम नागरिकों की मौतों पर चिंता व्यक्त की गई है.
बयान में कहा गया है कि यूरोपीय संघ इस संघर्ष में बड़ी संख्या में आम लोगों की मौतों और बड़े हथियारों के इस्तेमाल से बेहद नाराज़ है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार यूरोपीय संघ चाहता है कि बर्मा, दारफुर और फ़लस्तीनी क्षेत्रों की तर्ज पर श्रीलंका के मामले में भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का एक विशेष सत्र बुलाया जाए. इस बीच तमिल विद्रोहियों के प्रमुख वेलुपिल्लै प्रभाकरण के बारे में कोई पक्की सूचना नहीं मिली है.
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि वो मारे गए हैं लेकिन इसकी किसी भी स्तर पर पुष्टि नहीं हो सकी है. सेना का मानना है कि प्रभाकरण सेना के हाथों गिरफ्तारी की अपेक्षा आत्महत्या करना पसंद करेंगे जैसा कि वो शुरु से कहते रहे हैं. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति मंगलवार को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में युद्ध के ख़त्म होने की घोषणा कर सकते हैं.


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