प्रभाकरन की मौत, श्रीलंका में 26 वर्ष पुराना गृहयुद्ध खत्म (राउंडअप)
उसकी मौत से कुछ ही समय पहले प्रभाकरन के बड़े पुत्र चार्ल्स एंथनी और छह अन्य प्रमुख सहयोगियों के शव भी बरामद किए गए।
प्रभाकरन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के साथ ही श्रीलंका के कई नेताओं की हत्या के लिए भी जिम्मेदार था।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि 54 वर्षीय प्रभाकरन लिट्टे की खुफिया इकाई के प्रमुख पोट्टु अम्मान और समुद्री इकाई के प्रमुख सोसाइ के साथ एक वैन और एक एंबुलेंस के काफिले में जा रहा था तभी मुल्लइतिवु में सेना ने उस काफिले पर हमला कर दिया।
प्रभाकरन की मौत की खबर मिलते ही राजधानी कोलंबो और सिंहली बहुल मध्य और दक्षिणी प्रांतों के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज लहराए और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनानी शुरू कर दीं।
प्रभाकरन की मौत से कुछ ही समय पहले सेना ने उसके पुत्र चार्ल्स एंथनी समेत लिट्टे के कई प्रमुख नेताओं का शव बरामद किया। एंथनी ने आयरलैंड से शिक्षा प्राप्त की थी और वह लिट्टे की सूचना प्रौद्योगिकी इकाई का प्रमुख था और उसे अपने पिता का उत्तराधिकार संभालने के लिए तैयार किया जा रहा था।
श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सेना के जवानों ने चार्ल्स का शव सोमवार सुबह मुल्लईतिवु जिले के करायामुल्लावैकल इलाके से बरामद किया।
चार्ल्स के अलावा जिन छह लिट्टे नेताओं का शव बरामद हुए, उनमें संगठन का राजनीतिक प्रमुख बी. नदेसन , लिट्टे का शांति सचिवालय का प्रमुख सिवरत्नम पुलीदेवन, पुलिस इकाई का प्रमुख इलांगो, खुफिया इकाई प्रमुख कपिल अम्मान, चार्ल्स का सहयोगी सुदारमन और लिट्टे के सैन्य नेता रमेश शामिल हैं।
यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चार्ल्स और लिट्टे के ये छह प्रमुख नेता लड़ाई में मारे गए हैं और या इन लोगों ने पकड़े जाने की डर से आत्महत्या की है।
प्रभाकरन ने लिट्टे की स्थापना 1976 में की थी और 1983 में उसने आतंकवादी रुख अख्तियार कर लिया। प्रभाकरन ने इस संगठन को इतना ताकतवर सैन्य संगठन बनाया कि एक दौर में श्रीलंका के तटीय इलाके के दो-तिहाई हिस्से पर उसी का आधिपत्य था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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