आडवाणी बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष के पद पर, अटकलों पर विराम (लीड-1)
पार्टी के नेता अपने पद पर बने रहने के लिए आडवाणी को मनाने में सफल हो गए। माना जा रहा है कि उनकी इस पेशकश के बाद पार्टी नेताओं में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर जिस प्रकार की होड़ मच गई थी, उससे पार्टी में खींचतान मचने की आशंकाएं प्रबल हो गई थी। इसी खींचतान पर विराम लगाने के लिए आडवाणी 15वीं लोकसभा में भी विपक्ष का नेता बनने को राजी हुए हैं।
इसी संदर्भ में सोमवार को बुलाई गई पार्टी संसदीय बोर्ड, महासचिवों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "आडवाणीजी इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वह अपने अनुरोध पर जोर नहीं देंगे।"
गौरतलब है कि 16 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद आडवाणी ने पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक में नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। संसदीय बोर्ड ने उसी दिन आडवाणी की इस इच्छा को मानने से इंकार कर दिया था। बाद में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को आडवाणी को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इसके अगले ही दिन विपक्ष के अगले नेता को लेकर मीडिया में अटकलें तेज हो गई थी। इस पद के लिए पार्टी नेताओं की तरफ से तरह-तरह की बयानबाजियां आनी आंरभ हो गई। मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह और सुषमा स्वराज के नाम विपक्ष के नेता के रूप में मीडिया में तैरने तक लगे थे।
बहरहाल, राजनाथ सिंह ने कहा, "पार्टी को आडवाणीजी के नेतृत्व और मार्गदर्शन की जरूरत है। हमने उनसे अनुरोध किया कि वह 15वीं लोकसभा में पार्टी का नेता बनना स्वीकार करें। लोकसभा चुनाव में पार्टी को धक्का लगा है। इसे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपने को फिर से तैयार करने की जरूरत है। आडवाणीजी इस बात पर सहमत हुए हैं कि वह अपने अनुरोध पर जोर नहीं देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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